आइज़क न्यूटन जीवनी – Biography of Isaac Newton in Hindi Jivani

सर आइज़ैक न्यूटन इंग्लैंड के एक वैज्ञानिक थे। जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण का नियम और गति के सिद्धांत की खोज की। वे एक महान गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिष एवं दार्शनिक थे। इनका शोध प्रपत्र “Philosophiae Naturalis Principia Mathematica” सन् १६८७ में प्रकाशित हुआ, जिसमें सार्वत्रिक गुर्त्वाकर्षण एवं गति के नियमों की व्याख्या की गई थी और इस प्रकार चिरसम्मत भौतिकी (क्लासिकल भौतिकी) की नींव रखी।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

उनकी फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका, 1687 में प्रकाशित हुई, यह विज्ञान के इतिहास में अपने आप में सबसे प्रभावशाली पुस्तक है, जो अधिकांश साहित्यिक यांत्रिकी के लिए आधारभूत कार्य की भूमिका निभाती है। इस कार्य में, न्यूटन ने सार्वत्रिक गुरुत्व और गति के तीन नियमों का वर्णन किया जिसने अगली तीन शताब्दियों के लिए भौतिक ब्रह्मांड के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

न्यूटन ने दर्शाया कि पृथ्वी पर वस्तुओं की गति और आकाशीय पिंडों की गति का नियंत्रण प्राकृतिक नियमों के समान समुच्चय के द्वारा होता है, इसे दर्शाने के लिए उन्होंने ग्रहीय गति के केपलर के नियमों तथा अपने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बीच निरंतरता स्थापित की, इस प्रकार से सूर्य केन्द्रीयता और वैज्ञानिक क्रांति के आधुनिकीकरण के बारे में पिछले संदेह को दूर किया।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

यांत्रिकी में, न्यूटन ने संवेग तथा कोणीय संवेग दोनों के संरक्षण के सिद्धांतों को स्थापित किया। प्रकाशिकी में, उन्होंने पहला व्यवहारिक परावर्ती दूरदर्शी बनाया. और इस आधार पर रंग का सिद्धांत विकसित किया कि एक प्रिज्म श्वेत प्रकाश को कई रंगों में अपघटित कर देता है जो दृश्य स्पेक्ट्रम बनाते हैं। उन्होंने शीतलन का नियम दिया और ध्वनि की गति का अध्ययन किया।

प्रारंभिक जीवन :

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

न्यूटन का जन्म 25 December 1642 को क्रिसमस वाले पवित्र दिन को वुल्सथार्प,लंकशायर (इंग्लैंड) में हुआ था।  इनके जन्म से ठीक 3 महीने पहले इनके पिता का देहांत हो गया था। बचपन में ही पिता का साया सर से उठ जाने से इनको बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ा। जब ये 3 साल के हुए तो इनकी माँ ने फिर से नयी शादी कर ली, इनके पालन पोषण के लिए इनको दादी माँ के पास छोड़ गयी और खुद नए पति के साथ रहने चली गयी। न्यूटन को अपने सौतेले पिता बिलकुल अच्छे नहीं लगते थे। जब न्यूटन छोटे थे तो बहुत दिन तक ठीक से बोल नहीं पाते थे।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

जब ये 17 साल के हुए तो The King’s School, Grantham में इन्हें पढ़ने के लिए प्रवेश दिलाया। लेकिन इनका मन वहां पढाई में नहीं लगता था, क्यूंकि वहां गणित नहीं पढ़ाया जाता था। न्यूटन का मन शुरुआत से ही गणित विषय में बहुत लगता था। वे बचपन से ही आकाशीय पिंडों और ग्रहों की ओर आकर्षित रहते थे, और सूरज की किरणों को देखकर उन्हें आश्चर्य होता था। अक्टूबर 1659 को न्यूटन को स्कूल से निकाल दिया गया। इधर इनकी माँ के दूसरे पति का भी देहांत हो चुका था। इसी कारण माँ ने इन्हें खेती बाड़ी सँभालने को कहा। लेकिन न्यूटन का मन खेती बाङी में नहीं लगता था।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

हेनरी स्टोक्स जो कि The King’s School के प्रिंसिपल थे उन्होंने न्यूटन की माँ से न्यूटन को फिर से स्कूल में दाखिला दिलाने को कहा जिससे वो आगे की पढाई कर सकें। इस बार न्यूटन ने हताश नहीं किया और बहुत जल्दी वो स्कूल के टॉपर विद्द्यार्थी बने। किंग्स स्कूल, ग्रान्थम(King’s School, Grantham)में उन्होंने बारह वर्ष से सत्रह वर्ष की आयु तक शिक्षा प्राप्त की। बचपन में वह पढ़ाई में कुछ खास अच्छे नहीं थे। एक बार स्कूल में एक लड़के ने न्यूटन को पीटा मगर न्यूटन जब गुस्से में आ गए तो उस लड़के को भाग के अपनी जान बचानी पड़ी। फिर 1659 में जब उन्हें स्कूल से निकाला गया तो वे अपनी माँ के पास आ गए।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

अपने अंकल रेव विलियम एस्क्फ (Rev William Ayscough)के कहने पर जून 1661 में उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज(Trinity College, Cambridge) में अध्ययन के लिए प्रवेश लिया। पढ़ाई की फीस भरने और खाना खाने के लिए आइज़क न्यूटन कॉलेज में एक कर्मचारी की तरह काम भी करते थे। उस समय कॉलेज की शिक्षाएं अरस्तु पर आधारित थीं। लेकिन न्यूटन अधिक आधुनिक दार्शनिकों(modern philosophers) के विचारों को पढ़ना चाहते थे।

1664 में इनकी प्रतिभा के कारण एक स्कॉलरशिप की व्यवस्था कॉलेज की तरफ से हो गयी, जिसकी मदद से न्यूटन अब आगे की पढ़ाई कर सकते थे। उस समय विज्ञान बहुत आगे नहीं था। फिर यहीं रहकर न्यूटन ने प्रसिद्ध “केप्लर के नियम” पढ़े। 1665 में उन्होंने सामान्यीकृत द्विपद प्रमेय(Binomial Theorem) की खोज की और एक गणितीय सिद्धान्त(Mathematical concept) विकसित करना शुरू किया जो बाद में अत्यल्प कलन(Calculous) के नाम से जाना गया। न्यूटन ने इसकी जानकारी काफी समय बाद दी। इसक कारण उन्होंने ये बताया की उन्हें डर था कि न्यूटन ने कहा कि वे अपने अत्यल्प कलन(Calculous) को प्रकाशित कर कहीं उपहास के पात्र न बन जाएँ।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

न्यूटन ने गैलिलियो ,कैपलर , देकार्त और युक्लिड की रचनाओ को ज्यादा पढ़ा था | ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने युक्लिड को इसलिए पढना शुरू किया था क्योंकि वो नक्षत्र विज्ञानं की एक पुस्तक के कुछ चित्रों को समझने में नाकाम रहे थे | हालांकि उन्होंने इस पुस्तक को एक तुच्छ पुस्तक समझकर अलग रख दिया था किन्तु अपने शिक्षक के समझाने पर इसे पुनः पढ़ा था | अप्रैल 1664 ईस्वी में न्यूटन को छात्रवृति मिली जिसके कारण वो 1668 तक कैम्ब्रिज रुक गये थे | इस अवधि में न्युटन ने B.A.और M.A. की डिग्री भी ली थी |

सन 1665 इस्वी में अचानक लन्दन में प्लेग की महामारी फ़ैल गयी थी जिससे शहर मानो पूर्ण रूप से बंद हो गया हटा | शीघ्र की कैम्ब्रिज ने भी उसका अनुसरण करते हुए विश्वविद्यालय को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था | कुछ छात्र अपने शिक्षको के साथ निकटवर्ती गाँवों में चले गये | न्यूटन अपनी माँ के फ़ार्म पर लिकंन शायर चले गये | वो फ़ार्म उनके दादा रोबर्ट न्यूटन का था |

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Isaac Newton आइजक न्यूटन आगामी 18 महीनों तक ववही रहे | वो उनके लिए जबरदस्ती की छुट्टी थी लेकिन वो समय न्यूटन के लिए बेहद निर्णायक सिद्ध हुआ | इस अवकाशकाल में न्यूटन अपने कुछ विचार निश्चित किये | जिनके परिणाम ने विज्ञान में उनके लम्बे और फलदायी भविष्य की शुरुवात को जन्म दे दिया था |

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का पता लगाने की घटना, साढ़े तीन सौ साल पुरानी, 1660 के दशक के मध्य की घटना है। विलियम स्ट्यूक्ली ने लिखा है कि 1726 की बसंत में एक दिन एक सेब के पेड़ की छाया में न्यूटन ने उन्हें इस घटना के बारे में बताया। तब न्यूटन केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। प्लेग फैलने के कारण विश्वविद्यालय के बंद होने पर न्यूटन उत्तरी इंग्लैंड में अपने घर चले गए। न्यूटन ने स्ट्यूक्ली को बताया कि जिस तरह वह उस दिन उस सेब के पेड़ के नीचे बैठे थे, उसी तरह की अवस्था में वो एक पेड़ के नीचे बैठे सोच रहे थे जब एक सेब गिरा।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

स्ट्यूक्ली लिखते हैं- ‘न्यूटन बैठे सोच रहे थे। जब एक सेब गिरा, उन्होंने सोचा कि ये सेब सीधा ही क्यों गिरा, अगल-बगल या ऊपर क्यों नहीं गिरा…इसका मतलब धरती उसे खींच रही है, मतलब उसमें आकर्षण है। वैसे रॉयल सोसायटी की लाइब्रेरी के प्रमुख कीथ मूर का कहना है कि सेब के गिरने की कहानी शायद एक कहानी ही है जिसे न्यूटन ने बाद में आम लोगों को समझाने के लिए बना लिया। कीथ मूर कहते हैं, ‘न्यूटन ने सेब गिरने की कहानी का सहारा आम लोगों को गुरुत्वाकर्षण क्या है ये समझाने के लिए लिया और सेब के सिर पर गिरने की कहानी तो और भी बाद में बनाई गई।

वैज्ञानिक उपलब्धियां

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Optics – Newton ने बताया कि सूर्य का सफ़ेद प्रकाश असल में सफ़ेद ना होकर कुछ रंगों का मिश्रण है। इसके लिए उन्होंने सूर्य की किरणों को प्रिज्म से गुजारा तो देखा जामुनी, नारंगी, पीला, लाल, नीला, हरा और बैंगनी रंग का spectrum बनता है। इसे ही हम इन्द्रधनुष भी कहते हैं, जो हमें बारिश के दिनों में पानी की बूंदों से सूर्ये के प्रकाश के परावर्तित होने के कारण आकाश में दिखाई देता है। Telescope – Newton ने telescope के development में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यांत्रिकी और गुरुत्वाकर्षण 

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Newton ने मैकेनिक्स और गुरुत्व के क्षेत्र में बहुत काम किया। एडमंड हेली की मदद से उन्होंने अपनी फेमस बुक Principa Mathematica प्रकाशित करवाई। Newton ने इसमें three laws of motion को सत्यापित किया और गुरुत्वाकर्षण के नियम को परिभाषित किया। उनके ये नियम आने वाले समय में modern physics के लिए आधारस्तंभ साबित हुए। इसमें उन्होंने हमारे ग्रहों के planetary movements को भी explain किया।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Isaac Newton ने आजीवन विवाह नहीं किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी research और वैज्ञानिक खोजों को ही समर्पित किया। Newton ने बाइबिल पर अपने धार्मिक शोध भी लिखे। Newton England की संसद के सदस्य भी रहे। England में उन्हें वहां की टकसाल का वार्डन भी नियुक्त किया गया। यहाँ उन्होंने बहुत ही इमानदारी से काम किया। अपनी मौत तक वो इस पद पर बने रहे।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

अप्रैल 1705 में England की महारानी ऐनी ने Isaac newton को उनके राजनितिक योगदान के लिए ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक शाही यात्रा के दौरान नाइट की उपाधि दी। Isaac Newton की मृत्यु 31 मार्च 1727 (20 मार्च 1726 – old calendar) को नीद में सोते हुए हुई। उन्हें वेस्टमिंस्टर एब्बे में दफनाया गया।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow by Email
Instagram
Telegram