आम स्टूडेंट से OYO कंपनी तक का सफर, जाने क्या था वो आईडिया

आम जिंदगी में हम सफलता के लिए पढ़ाई-लिखाई और करियर पर फोकस करने पर जोर देते हैं. बचपन से हमें सिखाया भी यही जाता है कि कैसे उच्च शिक्षा हमारे करियर के नये रास्ते खोलेगी.

  • एक आइडिया ने बदली कॉलेज ड्रापआउट लड़के की जिंदगी, खड़ी की OYO कंपनी

    लेकिन ओयो कंपनी के संस्थापक रितेश अग्रवाल की सफलता का अलग ही फंडा है. महज 17 साल की उम्र में उन्होंने कामयाबी के झंडे गाड़ने शुरू कर दिए थे. जानें- कैसे बिना कॉलेज जाए आप भी रितेश की तरह अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं.

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    आज ही के दिन बीते साल 25 सितंबर को रितेश अग्रवाल को फोर्ब्स इंडिया ने टायकूंस ऑफ टुमारो की लिस्ट में शामिल किया था. उस वक्त उनकी उम्र 24 साल की थी, इसी उम्र में उन्होंने करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी थी. कॉलेज ड्रॉप आउट रितेश की कहानी हम सबको प्रेरणा देने वाली है.

    एक आइडिया ने बदली कॉलेज ड्रापआउट लड़के की जिंदगी, खड़ी की OYO कंपनी

    रितेश के पेरेंट्स चाहते थे कि उनका बेटा बड़ा होकर इंजीनियर बने. रितेश भी कोटा राजस्थान जाकर आईआईटी में एंट्रेंस के लिए तैयारी में लग गए. इस तैयारी के बीच में उन्होंने दिल्ली के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में एडमिशन लिया जिसे कंपनी शुरू करने के लिए बीच में छोड़ दिया.

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    उन्होंने बिजनेस का सोच तो लिया लेकिन अभी कुछ तय नहीं था, इसलिए बिजनेस की तैयारी के लिए वो एक शहर से दूसरे शहर में जाते. उस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी. बिजनेस तलाशने के लिए रितेश महीनों घूमते और ऐसे होटल में रुकते जो उनके बजट में फिट बैठता. इसी दौरान उनके मन में OYO जैसे स्टार्टअप का आइडिया आया.

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    कहते हैं कि एक आइडिया इंसान की जिंदगी बदल सकता है. कुछ ऐसा ही हुआ, अपने आइडिया को लेकर ही रितेश ने एक वेबसाइट तैयार कर दी. इस वेबसाइट में वो लोगों को सिर्फ ये जानकारी दे रहे थे कि किसी शहर में सस्ते और किफायती होटल कहां हैं. ‘ओरावल’ नाम से शुरू हुई ये वेबसाइट साल 2013 में ओयो में बदल गई. साल 2013 में उसका नाम OYO Rooms किया गया.

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    रितेश बचपन से ही होनहार रहे हैं. आठ साल की उम्र में सॉफ्टवेयर कोडिंग करने, एशिया में विज्ञान की दिशा में काम करने वाले शीर्ष लोगों की सूची में शामिल होने और अब तक टॉप 100 भारतीय इंजीनियरिंग कॉलेजों पर लिखने के लिए उनकी विशेष पहचान है.

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    ओयो रूम्स को आज पांच बिलियन डॉलर के बिजनेस में ढालने वाले रितेश का कहना है कि अगर आप एक इनोवेटिव सोलुशन चाहते हैं तो आपके पास खुला दिमाग होना बहुत जरूरी है. एक दिन पहले फाइनेंशियल एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में रितेश अग्रवाल ने कहा कि हम हमेशा इस बात पर यकीन करते थे कि सफलता की कहानी पांच साल तक कॉलेज में पढ़ाई, कड़ी मेहनत और लगन से ही लिखी जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है.

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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