इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ओबीसी की 17 जातियों को एससी में शामिल करने पर लगाई रोक

– पिछड़ी जातियों को एससी घोषित करने की योगी सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक
– हाईकोर्ट ने कहा, सिर्फ संसद को ही एससी/एसटी जाति में बदलाव करने का अधिकार
– समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव से तीन हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा

इलाहाबाद हाई कोर्ट से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने ओबीसी की 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के फैसले पर रोक लगा दी है।कोर्ट ने इस बारे में समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह से तीन हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की डिवीजन बेंच ने गोरखनाथ की याचिका पर प्रदेश सरकार के फैसले को गलत मानते हुए कहा कि इस तरह के फैसले लेने का अधिकार सरकार को नहीं था। इसलिए 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के योगी एवं पूर्ववर्ती सरकार की तीन अधिसूचनाओं पर रोक लगाई जाति है। इसी के साथ हाई कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह से 3 हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार कानून बनाकर किसी जाति को अनुसूचित जाति राष्ट्रपति की अधिसूचना से घोषित कर सकती है लेकिन राज्य सरकार को ऐसा अधिकार नहीं है। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 24 जून को 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का शासनादेश जारी किया था। इन पिछड़ी जातियों में निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा, गौड़ हैं। इन ओबीसी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने के पीछे योगी सरकार का कहना था कि ये जातियां सामाजिक और आर्थिक रूप से ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। योगी सरकार ने इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र देने का फैसला किया था। इसके लिए जिला अधिकारियों को इन 17 जातियों के परिवारों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए गए थे।

सपा-बसपा ने भी पहले की थी कोशिश
योगी सरकार से पहले सपा और बसपा ने भी 17 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने का आदेश जारी किया था। साल 2005 में मुलायम सिंह ने इन जातियों को एससी में शामिल करने का आदेश जारी किया था। लेकिन हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद 2007 में मायावती ने इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था, लेकिन केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया। साल 2016 में अखिलेश यादव की कैबिनेट ने 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अखिलेश ने केंद्र को नोटिफिकेशन भेजकर अधिसूचना जारी की थी लेकिन मामला केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में जाकर अटक गया था।

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