एक बार फिर दिल्ली पुलिस को याद आई किरण बेदी, अमूल्य पटनायक के सामने जवानों ने लगाए नारे

दिल्ली पुलिस के जवान वकीलों के साथ चल रहे विवाद को लेकर मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. नाराज जवानों को संबोधित करने के लिए मंगलवार दोपहर को दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक सामने आए, लेकिन उन्हें यहां भी विरोध का सामना करना पड़ा. प्रदर्शन कर रहे जवानों ने अमूल्य पटनायक के सामने नारे लगाए ‘हमारा CP कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो’.

 

दरअसल, दिल्ली पुलिस के जवान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सीनियर अफसरों को इस मामले में दखल देना चाहिए और वकीलों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए. जब DCP लेवल के अधिकारी प्रदर्शन कर रहे जवानों से बात करने पहुंचे तो उन्होंने कमिश्नर अमूल्य पटनायक के बाहर आने की मांग की.

दोपहर 12.30 बजे जब अमूल्य पटनायक बाहर आए और उन्होंने जवानों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए वापस ड्यूटी पर लौटने की बात कही तो जवानों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इसी दौरान जवानों ने नारे लगाए ‘हमारा कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो’.

सख्त छवि के लिए जानी जाती हैं किरण बेदी
आपको बता दें कि किरण बेदी अभी पुडुचेरी की उपराज्यपाल हैं. किरण बेदी पुलिस अधिकारी (IPS) बनने वाली पहली महिला थीं, उन्होंने 35 साल पुलिस में काम किया. किरण बेदी की छवि एक सख्त पुलिस अफसर के तौर पर रही थी, यही कारण है कि आज दिल्ली पुलिस के जवानों ने किरण बेदी के समर्थन में नारेबाजी की.

 

1982 में जब किरण बेदी दिल्ली पुलिस में थीं, तब सब इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने इंदिरा गांधी के कार्यालय की गाड़ी को उठवा लिया था क्योंकि वह गलत पार्क की गई थी. लेकिन तब किरण बेदी ने अपने जूनियर अफसर का बचाव किया था और PMO से भी भिड़ गई थीं.

मंगलवार को जवानों के समझाने पहुंचे मौजूदा दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने कहा कि वह इन मामलों में जांच कर रहे हैं और कानून के मुताबिक ही काम किया जाएगा. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे जवानों से शांति से अपनी ड्यूटी पर लौटने को कहा.

पुलिसकर्मियों को याद आई 31 साल पुरानी घटना

कोर्ट परिसर में हिंसक झड़प की घटना के बाद पुलिसकर्मियों को किरण बेदी की याद आ गई। जब उन्होंने 1988 की एक घटना में वकीलों के खिलाफ अपने पुलिस बल का खुलकर साथ दिया था। 1988 की घटना के दौरान तत्कालीन पुलिस उपायुक्त किरण बेदी ने वकीलों का सामना किया, जो चोरी के संदेह में एक वकील को हथकड़ी लगाए जाने का विरोध कर रहे थे। 17 फरवरी,1988 को करीब 3,000 लोगों की हिंसक भीड़ तीस हजारी कोर्ट परिसर पहुंची और वकीलों के वाहनों व कार्यालयों को उसने क्षतिग्रस्त कर दिया था। वकीलों ने आरोप लगाया था कि उक्त हिंसा उनकी हड़ताल के खिलाफ किरण बेदी द्वारा कराई गई थी। इसी घटना को याद करते हुए पुलिसकर्मियों ने ‘हमारा सीपी कैसा हो-किरण बेदी जैसा हो’ के नारे लगाये।

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