किन लोगों को करना चाहिए रथ सप्तमी का व्रत? जानें इसका महत्व

सूर्य के उत्तरायण होने पर प्रकृति के असीम ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए तमाम विधान बनाये गए हैं. उन्ही में से एक है ‘रथ या आरोग्य सप्तमी’ जो माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को कश्यप ऋषि और अदिति के संयोग से भगवान सूर्य का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को सूर्य की जन्मतिथि भी कहा जाता है.

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इस दिन पूजा और उपवास से आरोग्य तथा संतान की प्राप्ति होती है इसलिए इसको आरोग्य सप्तमी और पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है. इसी दिन से सूर्य के सातों घोड़े उनके रथ को वहन करना प्रारंभ करते हैं ,इसलिए इसको रथ सप्तमी भी कहते हैं. इस बार सूर्य की रथ सप्तमी 01 फरवरी को है .

किन लोगों के लिए यह उपवास व्रत विशेष फलवती है?

– जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच राशी का हो ,शत्रु क्षेत्री हो ,या कमजोर हो.

– जिन लोगो का स्वास्थ्य लगातार खराब रहता हो. जब बच्चे खूब बदमाशी करते हों.

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– जिन को शिक्षा में लगातार बाधा आ रही हो या आध्यात्मिक उन्नति नहीं कर पा रहे हों.

– जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा हो.

– जिन लोगों को प्रशासनिक कार्य करने हों या प्रशासनिक सेवा में जाना हो.

कैसे करें रथ सप्तमी या आरोग्य सप्तमी को पूजा आराधना?

– प्रातः स्नान करें तथा सूर्य, और पितृ पुरुषों को जल अर्पित करें

– घर के बाहर या मध्य में सात रंगों की रंगोली (चौक) बनाएं.

– मध्य में चार मुख वाला दीपक रक्खें ,चारों मुखों को प्रज्ज्वलित करें.

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– लाल पुष्प और शुद्ध मीठा पदार्थ अर्पित करें.

– गायत्री मंत्र,या सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें.

– जाप के उपरान्त गेंहू,गुड,तिल,ताम्बे का बर्तन तथा लाल वस्त्र दान करें.

– तत्पश्चात घर के प्रमुख के साथ साथ सभी लोग भोजन ग्रहण करें.

 

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