कृषि से जुड़े विधेयकों की खास बातें जो आपको जरूर जाननी चाहिए

बिहार में कोसी रेल महासेतु समेत कई परियोजनाओं का लोकार्पण समारोह में प्रधाानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कई दशकों तक देश में शासन करने वाले आज किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे।

किसान विकास और कृक्षि क्षेत्र में सुधारों से जुड़े विधेयकों पर राजनीतिक गलियारे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। ऐसे में हर किसी के लिए यह जरूरी है कि वे विधेयकों से जुड़े किसी भी दुष्‍प्रचार में नहीं पड़े। और उसके लिए जरूरी है सुधारों को गहराई से जाना।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

दरअसल खेती से जुड़े तीन प्रस्तावित कानून भारत में किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेंगे। जब इन विधेयकों को अध्यादेश के रूप में लाया गया था तो आम तौर पर उनका स्वागत किया गया था, लेकिन अब जब उन्हें कानून का रूप देने की कोशिश की जा रही है तो विरोधी दल दुष्प्रचार और संकीर्ण स्वार्थों की राजनीति कर रहें हैं। किसान हितैषी कदम को किसान विरोधी साबित करने मे लगे हुआ हैं।

ऐसा दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उपज मंडियों (एपीएमसी) को बंद हो जायगी, जबकि ऐसा कतई नहीं है। सरकार का फोकस किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर है। इस कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य को कोई खतरा नहीं है। वहीं, मंडियों की व्यवस्था भी बनी रहेगी। कीमतों के शोषण से बचाने का वादा करता है। कृषि क्षेत्र में सम्पूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाया जा सकेगा, किसान मजबूत होगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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अब तक का सबसे बड़ा कृषि सुधार

1. द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल 2020

इस कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य को कोई खतरा नहीं

ऐसा आरोप कि मंडियों से मार्केट रेगुलेट होता है। मंडियां खत्म हो गईं, तो किसानों को एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।

• जबकि इस कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य को कोई खतरा नहीं है। वहीं, मंडियों की व्यवस्था भी बनी रहेगी।

• एमएसपी पहले की तरह ही जारी रहेगा जबकि दूसरे स्थान पर बढ़े हुए सामान के दाम का फायदा किसान वहां अपना सामान बेंचकर उठा सकेगा। ये बिल किसानों के हित में है और इससे उनको ज्यादा फायदा कमाने का मौका मिलेगा।

मौजूदा व्यवस्था

• किसानों के पास अपनी फसल बेचने के ज्यादा विकल्प नहीं है।
• किसानों को कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) में फसल बेचनी होती है।

कानून से बदलाव

• ऐसा इको-सिस्टम बनेगा, जहां किसान मनचाहे स्थान पर फसल बेच सकेंगे।
• इंटर-स्टेट और इंट्रा-स्टेट कारोबार बिना किसी अड़चन कर सकेंगे।

2- द फार्मर्स (एम्पॉवरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस बिल 2020

कीमतों के शोषण से बचाने का वादा

आरोप कि यह बिल कीमतें तय करने का कोई मैकेनिज्म नहीं बताता। इससे प्राइवेट कॉर्पोरेट हाउसेस को किसानों के शोषण कर लेंगे।

• जबकि इस कानून से कीमतों के शोषण से बचाने का वादा करता है। उपज की खरीद पहले की तरह एमएसपी पर होती रहेगी। यह किसी कॉर्पोरेट की आमदनी बढ़ाने के लिए नहीं, किसान की आमदनी बढ़ाने के लिए है।
• इसमें प्रावधान है कि किसी भी सूरत में किसानों की जमीन की खरीद का करार नहीं किया जा सकेगा। जमीन पर किसान का मालिकाना हक बना रहेगा।
• इससे प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। मंडी का लाइसेंस राज और भ्रष्टाचार समाप्त होगा तथा किसान को कहीं भी अपनी उपज बेचने और व्यापारी को कहीं भी व्यापार करने की छूट मिलेगी।

मौजूदा व्यवस्था

• भारत में किसानों की कमाई पूरी तरह से मानसून, और बाजार के अनुकूल रहने पर निर्भर है। इससे किसानों को मेहनत के अनुसार रिटर्न नहीं मिलता।

कानून से बदलाव

• खेती से जुड़ी सारी रिस्क किसानों की नहीं, बल्कि जो उनसे एग्रीमेंट करेंगे, उन पर शिफ्ट हो जाएगी। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग को नेशनल फ्रेमवर्क मिलेगा।
• किसान एग्री-बिजनेस करने वाली कंपनियों, प्रोसेसर्स, होलसेलर्स, एक्सपोर्टर्स और बड़े रिटेलर्स से एग्रीमेंट कर आपस में तय कीमत पर उन्हें फसल बेच सकेंगे। इससे उनकी मार्केटिंग की लागत बचेगी। दलाल खत्म होंगे।
• कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग भारत में नया नहीं है। अनाज के लिए अनौपचारिक करार आम है। गन्ने और पोल्ट्री सेक्टर में औपचारिक करार भी होते हैं।

3. आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020

अनाज, दाल, प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर, किसानों की आय बढ़ेगी। लोग सोच रहे हैं कि यह बिल कि खाद्य वस्तुओं पर रेगुलेशन खत्म करने से एक्सपोर्टर्स, प्रोसेसर्स और कारोबारी फसल सीजन में जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ सकती है।

• आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020 अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्‍याज आलू को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान करता है. इससे निजी निवेशकों को उनके व्‍यापार के परिचालन में अत्‍यधिक नियामक हस्‍तक्षेपों की आशंका दूर हो जाएगी।
• उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण और आपूर्ति की स्‍वतंत्रता से बिक्री की अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाने में मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र/विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश आकर्षित होगा. इससे किसान मर्जी के मुताबिक इसका निर्यात और भंडारण कर सकेंगे, इससे उनकी आय बढ़ सकेगी।
• इस विधेयक के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सम्पूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाया जा सकेगा, किसान मजबूत होगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि इससे कृषि क्षेत्र में कारोबार अनुकूल माहौल बनाने और ‘‘वोकल फार लोकल’’ को मजबूत बनाया जायेगा।

मौजूदा व्यवस्था

एसेंशियल कमोडिटी एक्ट की वजह से कोल्ड स्टोरेज, गोदामों, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट में निवेश कम होने की वजह से किसानों को लाभ नहीं मिल पाता।

कानून से बदलाव

• इस कानून से कोल्ड स्टोरेज और फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। यह किसानों के साथ ही उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।
• अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाया गया है। इससे उत्पादन, स्टोरेज, मूवमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म हो जाएगा।

 

 

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