कोरोना काल में बिगड़ सकता है लोगों का मानसिक संतुलन : स्वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ

कोरोना वायरस महामारी ने लोगों के मानसिक स्तर पर भी काफी प्रभावित किया है। जिस तरह वायरस से संक्रमितों के केस बढ़ रहे हैं वैसे ही मानसिक रोगियों कि संख्या भी पूरे विश्व में बढ़ती जा रही है। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड महामारी के बाद एक मानसिक रोग की महामारी भी आ सकती है। हाल ही में इस पर एक शोध भी सामने आया है, जो काफी चौंकाने वाले हैं।

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कोरोना में कितना प्रभावित हो रहा है लोगों का मानसिक स्तर

इस बारे में बताते हुये सर गंगाराम अस्‍पताल, नई दिल्ली के डॉ. मोहसिन वली ने बताया कि इटली की एक पत्रिका में सैन रेफेल अस्पताल के एक्सपर्ट ने लिखा है कि आगे आने वाले दिनों में 30-32 प्रतिसत लोगों में डिप्रेशन, 42 प्रतिशत में एज़ाइटी, 40 प्रतिशत लोगों में नींद की कमी और 20 प्रतिशत लोगों में ऑब्‍सेशन कम्‍पल्‍शन डिसऑर्डर (obsession compulsion disorder) हो सकता है। इसकी संख्या और बढ़ सकती है, और खास कर कोविड होने के समय में अलग-अलग तरह से ये सब हो रहा है। दरअसल जो लोग अपने मस्तिष्क को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, इनमें ऐसे लक्षण हो सकते हैं।

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ऐसा क्यों हो रहा है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कोरोना से ठीक हो रहे लोगों में 3-4 महीने तक शरीर में दर्द, जकड़न, सुस्ती, आदि रहती है। इसे लॉन्ग हॉलर्स कहते हैं। ऐसे लोगों में अगर कोई परेशानी आ रही है और उनके आरएनए टेस्ट कर रहे हैं तो उसका असर दिख रहा है। ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनकी मानसिक स्थिति में बदलाव आ रहा है, जैसे अचानक शांत हो जाना, या किसी से बात नहीं करना, आदि। कई लोगों में भविष्य को लेकर चिंता, तनाव से भी ऐसी स्थिति आ रही है।

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मास्क पर किया अनूठा प्रयोग

वहीं मास्क न लगाने के लिये लोगों के अलग-अलग तर्क हैं, ऐसे लोगों के लिये डॉ वली ने खुद से एक रिसर्च किया। जिसमें उन्होंने बताया कि मास्क को लेकर लोगों ने मुझे कई तरह की समस्याएं बताईं। मैने उनकी बातों को समझने के लिए, तीन दिन तक डबल मास्क लगाया, एक सर्जिकल और एन95 मास्क और दो दिन ट्रिपल लेयर मास्क लगा कर अस्पताल गया और पूरे दिन लगाये रखा, लेकिन मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। इससे साफ है कि जो लोग तर्क दे रहे हैं, वो वास्‍तव में मास्‍क लगाना ही नहीं चाहते हैं।

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पूरा विश्व चाहता है भारत रहे सुरक्षित

इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि भारत में केस बढ़ रहे हैं, लेकिन आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जनसंख्या को देखते हुए हमारे देश में अभी भारत की स्थिति अभी खराब नहीं कह सकते हैं, लेकिन अलावा हमारे लिये हर एक व्यक्ति की जान की कीमत है। जो सबसे अच्छी बात है, अभी भी जितने केस आये उस हिसाब से मृत्यु दर काफी कम है। एक बात और भारत सुरक्षित रहे और यहां स्थिति कंट्रोल में रहे, यह बात हम ही नहीं बल्कि दूसरे देश वाले भी चाहते हैं। क्योंकि वैक्सीन (vaccine) आने पर उसके प्रोडक्शन की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भारत को निभानी है।

 

 

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