क्या आपने देखी है लाल भ‍िंडी, इन बीमार‍ियों के लिए है रामबाण

हरी सब्जियों में से एक भिंडी को खाने में शामिल करने पर हमारा पूरा जोर रहता है. लेकिन क्या आपको पता है कि लाल रंग की भिंडी आ गई है.
क्या आपने देखी है लाल भ‍िंडी, इन बीमार‍ियों के लिए है रामबाण

लाल भिंडी ‘काशी लालिमा’ न केवल उम्दा स्वाद उसी हरी भिंडी की ही तरह देगी, बल्कि हरी भिंडी से कहीं ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगी. यह कई बीमारियों से लड़ने में कारगार साबित होगी. ये सब वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान की 8 वर्षों की मेहनत के चलते संभव हो सका.

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‘काशी लालिमा’  को विकसित करने में 8-10 वर्षों की कड़ी मेहनत वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने की है. दरअसल लाल भिंडी के विकास की इसी तरह की भिंडी से हुआ जो कभी कहीं पाई गई थी. वैज्ञानिकों ने चयन विधि का प्रयोग करके इसी लाल भिंडी की प्रजाति को और विकसित किया. इस भिंडी में आम हरी सब्जी यहां तक की भिंडी में पाए जाने वाले क्लोरोफिल की जगह एंथोसाइनिन की मात्रा होती है जो इसके लाल रंग का कारक है.

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इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की मानें तो आम भिंडी से कहीं ज्यादा इसमें आयरन, कैल्‍श‍ियम और जिंक की मात्रा होती है. सामान्य भिंडी से कहीं ज्यादा इसमें पोषक तत्व होने के चलते ये कहीं ज्यादा स्वास्थवर्धक है. सामान्य हरी भिंडी की ही तरह इसको उगाना भी आसान होता है. इसमें लागत भी उतनी ही आती है. इतना ही नहीं इसके लाल रंग की वजह से इसमें एंटीऑक्स‍िडेंट कहीं ज्यादा है. वैज्ञानिक इसे पकाकर खाने के बजाए सलाद के रूप में खाने की सलाह देते हैं. वैज्ञानिक इस भिंडी को और भी ज्यादा विकसित करने में लगे हैं.

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भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के तकनीकी अधिकारी बताते हैं कि इस भिंडी को लगाने में किसानों को डेढ़ गुना तक फायदा होगा, क्योंकि इसको लगाने के तरीके से लेकर लागत तक सब कुछ सामान्य भिंडी की तरह है. इस आकर्षक भिंडी को बेचकर किसान डेढ़  गुना ज्यादा मुनाफा बाजार से कमा लेंगे.

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वहीं संस्थान के निदेशक की मानें तो ये भिंडी अपने आप में बहुत ज्यादा चमत्कारी है खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए जिनके शरीर में फॉल‍िक अम्ल की कमी के चलते बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता है. वह फॉल‍िक अम्ल  भी इस काशी लालिमा भिंडी में पाया जाता है. इतना ही नहीं इस भिंडी में पाए जाने वाले तत्व लाइफ स्टाइल डिजीज जैसे हृदय संबंधी बामारी, मोटापा और डायब‍िटीज को भी नियंत्रित करती है.

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संस्थान के निदेशक बताते हैं कि लाल या हरी भिंडी पकने के बाद स्वाद में एक जैसी ही होती है. वे बताते हैं कि इस भिंडी को बेचकर किसान काफी मुनाफा कमाएंगे. अभी वैज्ञानिक इस लाल भिंडी की पैदावार को बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं. एक हेक्टेयर में हरी भिंडी 190-200 क्व‍िंटल तक पैदावार देती है तो वहीं काशी लालिमा की उपज 130-150 क्व‍िंटल तक ही है.

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निदेशक बताते हैं कि उनके संस्थान के पहले छत्तीसगढ़ के कुछ जनजाति इलाकों में कुछ छात्र लाल भिंडी पैदा कर रहे हैं लेकिन सबसे पहले भारत में इसको परिष्कृत रूप में वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में उगाया गया है. इससे पहले अमेरिका के क्लीमसन विवि में भी लाल भिंडी को उगाया जा चुका है.

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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