चाँद का पहला यात्री आर्मस्ट्रॉन्ग – Neil Armstrong On The Moon

नील अल्डेन आर्मस्ट्रॉन्ग – Neil Armstrong एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और चाँद पर जाने वाले पहले इंसान थे। वे एक एरोस्पेस इंजीनयर, नौसेना विमान चालक, टेस्ट पायलट और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर थे। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले आर्मस्ट्रॉन्ग यूनाइटेड स्टेट के नेवी ऑफिसर और कोरियाई युद्ध में सेवारत थे।

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चाँद का पहला यात्री – आर्मस्ट्रॉन्ग | Neil Armstrong On The Moon

युद्ध के बाद पुरदुरे यूनिवर्सिटी से उन्हें बैचलर की उपाधि प्राप्त की और हाई स्पीड फ्लाइट स्टेशन नेशनल एडवाइजरी कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (NACA) में टेस्ट पायलट के पद पर सेवारत सेवा की । वहाँ उन्होंने तकरीबन 900 फ्लाइट टेस्ट की। बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथर्न कैलिफ़ोर्निया से उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया।

वे यूनाइटेड स्टेट एयर फ़ोर्स मैन (Man) स्पेस सूनेस्ट और X-20 Dyne-Soar ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के सदस्य भी थे। 1962 में आर्मस्ट्रॉन्ग नासा के एस्ट्रोनॉट कॉर्प्स में शामिल हुए थे। 8 मार्च 1966 को कमांड पायलट के रूप में उन्होंने अपनी पहली स्पेस फ्लाइट उड़ाई थी। उस समय वे नासा के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे। पहली बार उन्होंने पायलट डेविड स्कॉट के साथ उड़ान भरी थी। लेकिन उनकी यह उड़ान बाद में रद्द कर दी थी।
आर्मस्ट्रांग की दूसरी और अंतिम स्पेसफ्लाइट कमांडर के रूप में अपोलो 11 थी, पहली फ्लाइट जुलाई 1969 को चाँद पर उतरी थी। आर्मस्ट्रांग और चन्द्रमा मोड्यूल पायलट बज्ज एल्ड्रिन चन्द्रमा की सतह पर अवतरित हुए थे और उन्होंने पुरे 2.30 घंटे स्पेस क्राफ्ट के बाहर बिताये थे, जबकि माइकल कॉलिंस चन्द्रमा ऑर्बिट में ही सर्विस मोड्यूल में थे। कॉलिंस और एल्ड्रिन के साथ आर्मस्ट्रांग को प्रेसिडेंट रिचर्ड निक्सन ने प्रेसिडेंशल मेडल ऑफ़ फ्रीडम अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था। प्रेसिडेंट जिमी कार्टर ने 1978 में आर्मस्ट्रांग को कांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ़ हॉनर से सम्मानित भी किया था। आर्मस्ट्रांग और उनके पुराने सहकर्मियों को भी 2009 में कांग्रेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था।
कोरोनरी बाईपास सर्जरी करवाने के बाद 82 साल की उम्र में 25 अगस्त 2012 को उनकी मृत्यु हो गयी थी।

प्रारंभिक जीवन –

नील आर्मस्ट्रांग – Neil Armstrong का जन्म 5 अगस्त 1930 को औग्लैज़ देश में ऑहियो के वापकोनेता में हुआ था। उनके पिता का नाम स्टेफेन कोएँग़ आर्मस्ट्रांग और माता का नाम वाइला लौईस एंगेल था। वे एक स्कॉटिश, आयरिश और जर्मन वंशज थे और उनके दो छोटे भाई जून और डीन भी है। ऑहियो राज्य सरकार के लिए उन्हें ऑडिटर का काम भी किया है। आर्मस्ट्रांग का जन्म होने के बाद उनका परिवार बार-बार उसी राज्य में घर बदलता रहा। बचपन से ही नील में उडान भरने की रूचि थी, वे बहोत सी एयर रेस में भी भाग लेते थे। जब वे सिर्फ पाँच साल के थे तभी उन्होंने 20 जुलाई 1936 को फोर्ड त्रिमोटर में पहली एयरप्लेन फ्लाइट का अनुभव लिया था।

अंतिम बार उनका परिवार 1944 में बसा था, उस समय उनका परिवार नील के जन्मस्थान वापकोनेता में रहने लगा था। फ्लाइंग का अभ्यास करने के लिए आर्मस्ट्रांग ग्रास्सी वापकोनेता एयरफील्ड में ब्लुमे हाई स्कूल जाते थे। अपने 16 वे जन्मदिन पर उन्हें पहला स्टूडेंट फ्लाइट सर्टिफिकेट भी मिला था। इसके बाद उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला। आर्मस्ट्रांग एक सक्रीय विद्यार्थी थे और उन्हें ईगल स्काउट की पदवी भी दी गयी थी। किशोरावस्था में ही उन्होंने बहोत से ईगल स्काउट अवार्ड अर्जित किये और साथ ही उन्हें सिल्वर बफैलो अवार्ड भी मिला था। 18 जून 1969 को चन्द्रमा की यात्रा करते समय कोलंबिया में आर्मस्ट्रांग ने स्काउट को कहा था की, “मै अपने सभी सहकर्मी स्काउट को हेल्लो कहना चाहता हु और यात्रा के लिए सभी का अभिनंदन करना चाहता हु, अपोलो 11 निश्चित ही हमारी इच्छाओ पर खरा उतरेगा।”

1947 में 17 साल की आयु में आर्मस्ट्रांग ने एयरोनॉटिकल इंजिनियर की पढाई पुर्दुर यूनिवर्सिटी से ग्रहण करना शुरू की। कॉलेज जाने वाले वे उनके परिवार के दुसरे इंसान थे। पढने के लिए उन्होंने मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) को भी अपना लिया था। आर्मस्ट्रांग का मानना था की हम कही भी पढ़कर अच्छे से अच्छी शिक्षा हासिल कर सकते है।

होलीवे (Hollyway) प्लान के तहत ही उनकी ट्यूशन फीस दी जाती थी। वहा उन्होंने तक़रीबन 2 साल पढाई कि और दो सालो तक फ्लाइट ट्रेनिंग भी ली और एक साल तक US नेवी में कार्यरत रहे और वही से उन्होंने बैचलर की डिग्री भी हासिल की। वहा कैंडिडेट को लिखकर देना होता था की ग्रेजुएशन होने तक वह शादी नही करेगा ताकि कैंडिडेट अच्छी तरह से अपने काम में ध्यान लगा सके और तक़रीबन दो साल तक उन्हें वहा कोई प्रमोशन भी नही दिया जाता था।

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चन्द्रमा पर लैंडिंग (Neil Armstrong Moon Landing)

1969 में आर्मस्ट्रांग को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। माइकल कॉलिंस और एडविन इ. बज्ज एल्ड्रिन के साथ वे नासा के पहले चन्द्र मिशन का हिस्सा बने हुए थे। 16 जुलाई 1969 को उनकी तिकड़ी अंतरिक्ष पहुची। मिशन कमांडर आर्मस्ट्रांग ने 20 जुलाई 1969 को चन्द्रमा की सतह पर लैंडिंग की थी। लेकिन उनके सहकर्मी कॉलिंस कमांड मोड्यूल में ही बैठे थे।

10.56 PM को आर्मस्ट्रांग चन्द्रमा मोड्यूल से बाहर निकले थे। उन्होंने कहा था, “इंसान का यह छोटा सा कदम, मानवी जाती के लिए एक बहुत बड़ी छलांग है।” उन्होंने ही चद्रमा पर अपना पहला कदम रखा था। तक़रीबन 2.30 घंटे तक नील और एल्ड्रिन ने चन्द्रमा के कुछ सैंपल (Sample) जमा किया और उनपर प्रयोग भी किया। उन्होंने बहुत से फोटो भी निकाले जिनमे उनके खुद के पदचिन्हों का फोटो भी शामिल है।
24 जुलाई 1969 को अपोलो 11 से वे वापिस आये थे और हवाई के पेसिफिक वेस्ट ओसियन पर उन्होंने लैंडिंग की थी। इसके बाद तीन हफ्तों तक तीन अंतरिक्ष यात्रियों को संगरोध पर भेजा गया था।

धरती पर वापिस लौटने के बाद तीनो अंतरीक्ष यात्रियों की काफी तारीफ की गयी थी और उनका स्वागत भी किया गया था। उनके सम्मान में न्यू यॉर्क शहर में एक परेड भी रखी गयी थी। अपने अतुलनीय कार्यो के लिए आर्मस्ट्रांग को बहुत से प्रशंसनीय अवार्ड मिले है जिसमे कांग्रेशनल स्पेस मेडल भी शामिल है।

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