जानिए राफेल विमान से जुड़ी खास बातें

भारतीय वायुसेना के अम्बाला एयरफोर्स स्टेशन पर आज पांच राफेल विमानों की इंडक्शन सेरेमनी सम्पन्न हुई। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पर्ली उपस्थित रहीं। सेरेमनी के दौरान पांचों राफेल फाइटर विमानों ने अपनी अद्भुत क्षमताओं का रोचक प्रदर्शन किया। साथ में भारतीय वायुसेना के अन्य विमानों व हेलीकॉप्‍टरों ने आसमान में करतब दिखाये।

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झक्कास खबर
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आइये एक नज़र डालते हैं राफेल की कुछ ऐसी खूबियों पर जो आपको जरूर मालूम होनी चाहिए: –

राफेल में लग सकती हैं तीन तरह की मिसाइल

भारत को दो इंजन वाले राफेल विमान की दरकार काफी लम्बे समय से थी। राफेल लड़ाकू विमान का कॉम्बैट रेडियस 3700 किलोमीटर है। राफेल में हवा से हवा में मार करने वाली तीन तरह की मिसाइल लगाई जा सकती हैं, जिसमें मीटियोर मिसाइल, स्कैल्प मिसाइल और हैमर मिसाइल हैं। अभी इसमें मीटियोर मिसाइल, स्कैल्प मिसाइल लगाई गई हैं और आने वाले दिनों में हैमर मिसाइल लगाए जाने की योजना है।

एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है राफेल

राफेल लड़ाकू विमान की खासियत यह है कि यह टेक ऑफ करते ही ऊंचाई तक पहुंचने में अन्य विमानों से काफी आगे है। राफेल की ऊंचाई पर जाने की क्षमता 300 मीटर प्रति सेकंड है, जो चीन-पाकिस्तान के विमानों को भी मात देता है। अर्थात, राफेल उड़ान भरते ही एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है। मौजूदा समय में चीन से टकराव के चलते बर्फीली पहाड़ियों वाली लद्दाख सीमा के हिसाब से राफेल लड़ाकू विमान फिट बैठता है। राफेल वह मल्टी रोल लड़ाकू विमान है और यह पहाड़ों पर कम जगह में भी उतर सकता है। इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं।

एक साथ 40 टारगेट पहचान सकता है राफेल

राफेल पर लगी गन एक मिनट में 2500 फायर करने में सक्षम है। राफेल में जितना तगड़ा रडार सिस्टम है। ये 100 किलोमीटर के दायरे में एक बार में एक साथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है। राफेल में अभी जो मिसाइलें लगी हैं, वो सीरिया, लीबिया जैसी जगहों में इस्तेमाल हो चुकी हैं। इसके अलावा जल्द ही इजराइली स्पाइस-2000 को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

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2022 तक हो जाएगी सभी 36 विमानों की आपूर्ति

भारतीय वायुसेना को अभी तक पांच राफेल लड़ाकू विमान मिले हैं। दूसरी खेप में चार और राफेल अक्टूबर में आने वाले हैं। वर्ष 2022 तक सभी 36 विमानों की आपूर्ति किये जाने का भरोसा फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने दिया है। जिन्हें अलग-अलग एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। 36 राफेल विमानों में से 30 लड़ाकू विमान होंगे और छह ट्रेनर होंगे। ट्रेनर विमान ट्विन-सीटर होंगे और उनमें फाइटर जेट्स की लगभग सभी विशेषताएं होंगी।

अंबाला के बाद पश्चिम बंगाल में होगी दूसरी एयरबेस

राफेल लड़ाकू विमान अभी अंबाला एयरबेस पर तैनात हैं, जो चीन और पाकिस्तान सीमा के पास है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में ये बिल्कुल भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। राफेल जेट का पहली स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ अंबाला हवाई अड्डे पर बनाई गई है। जबकि, दूसरी स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाल में हासिमारा बेस पर होगी। एक बार फ्यूल भरने पर यह लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है। इसमें हवा में ही फ्यूल भरा जा सकता है। फ्रांस से भारत आते समय भी रास्ते में फ्रांसीसी विमानों ने राफेल को हवा में ही ईंधन दिया था।

 

 

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