जानें किस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों को दी 5 एकड़ जमीन

देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने सर्वसम्मत फैसले में अयोध्या की विवादित भूमि पर राम मंदिर बनाने का आदेश दिया है। न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान बेंच ने मुसलमानों को अलग जगह पर पांच एकड़ भूमि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विवादित भूमि फिलहाल केंद्र सरकार अधिग्रहीत करेगी। केंद्र सरकार तीन माह के अंदर ट्रस्ट का गठन कर उस भूमि को मंदिर निर्माण के लिए देगी।

सुप्रीम कोर्ट के वकील उपेंद्र मिश्र ने बताया, ‘सर्वोच्च अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अगल से पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।

क्या है अनुच्छेद 142
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में न्याय करने और फैसले को पूरा करने के लिए ऐसे आदेश देने की शक्ति मिली हुई है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक केंद्र सरकार को तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाना होगा. राम मंदिर बनाने का फैसला ये ट्रस्ट ही लेगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि अयोध्या में राम जन्मस्थान के दावे पर विवाद नहीं है. कोर्ट ने 2003 की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट स्वीकार की और माना कि खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी. मस्जिद के नीचे मिला ढांचा इस्लामिक नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में किसी को केस में खर्च किए गए हर्जे खर्चे को भी नहीं दिलाया. आमतौर पर कोर्ट उस पक्ष को मुआवजा दिलाता है, जिसके पक्ष में फैसला आता है.

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