तेजस में उड़ान भरने वाले पहले रक्षा मंत्री बने राजनाथ, कहा – भारत इसे निर्यात करने की स्थिति में

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के हवाई अड्डे से स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ में उड़ान भरी। इसके साथ राजनाथ टू सीटर तेजस एयरक्राफ्ट में उड़ान भरने वाले देश के पहले रक्षामंत्री भी बन गए हैं। करीब आधे घंटे तक उड़ान भरने के बाद उन्होंने कहा कि तेजस में उड़ान भरने का अनुभव अद्भुत और शानदार रहा।
रक्षामंत्री राजनाथ के इस लड़ाकू विमान में चढ़ने से पहले भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के पायलटों की एक ब्रीफिंग हुई। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य उन अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना है जो स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमानों के विकास में शामिल रहे।
रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ‘तेजस’ भारतीय वायुसेना की 45वीं स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग ड्रैगर्स’ का हिस्सा है। लड़ाकू विमान को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(एचएएल) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने डिजाइन और विकसित किया है।

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जंग के लिए तैयार है तेजस
वायुसेना ने दिसंबर 2017 में एचएएल को 83 तेजस जेट बनाने का जिम्मा सौंपा था। इसकी अनुमानित लागत 50 हजार करोड़ रुपए थी। रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने इसी साल 21 फरवरी को बेंगलुरु में हुए एयरो शो में इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस जारी किया था। इसका आशय यह है कि तेजस युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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तेजस ने पिछले हफ्ते नौसेना में शामिल होने के लिए एक बड़ा परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया था। डीआरडीओ और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के अधिकारियों ने गोवा की तटीय टेस्ट फैसिलिटी में तेजस की अरेस्टेड लैंडिंग कराई थी। तेजस यह मुकाम पाने वाला देश का पहला एयरक्राफ्ट बन गया है।

तेजस पाक का जेएफ-17 चीन का सुखोई
स्पीड 2205 किमी प्रति घंटा 2500 किमी प्रति घंटा
रेंज 3200 किमी 3500
मिसाइल 8 5

लड़ाकू विमान को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने डिजाइन और विकसित किया है। तेजस भारतीय वायुसेना की 45वीं स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग ड्रैगर्स’ का हिस्सा है।

क्या है अरेस्टेड लैंडिंग?
नौसेना में शामिल किए जाने विमानों के लिए दो चीजें सबसे जरूरी होती हैं। इनमें एक है उनका हल्कापन और दूसरा अरेस्टेड लैंडिंग। कई मौकों पर नेवी के विमानों को युद्धपोत पर लैंड करना होता है। चूंकि, युद्धपोत एक निश्चित भार ही उठा सकता है, इसलिए विमानों का हल्का होना जरूरी है। इसके अलावा आमतौर पर युद्धपोत पर बने रनवे की लंबाई निश्चित होती है। ऐसे में फाइटर प्लेन्स को लैंडिंग के दौरान रफ्तार कम करते हुए, छोटे रनवे में जल्दी रुकना पड़ता है। यहां पर फाइटर प्लेन्स को रोकने में अरेस्टेड लैंडिंग काम आती है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

पांच देशों के एयरक्राफ्ट में ही यह तकनीक मौजूद
इससे पहले अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन द्वारा निर्मित कुछ विमानों में ही अरेस्टेड लैंडिंग की तकनीक रही है। तेजस की अरेस्टेड लैंडिंग सफल होने के साथ ही विमान को नेवी में शामिल किए जाने का एक चरण पूरा हो गया है। पायलट्स को अब एयरक्राफ्ट कैरियर- आईएनएस विक्रमादित्य पर तेजस की लैंडिंग करके दिखानी होगी।

उल्लेखनीय है कि वायुसेना ने दिसम्बर, 2017 में एचएएल को 83 तेजस जेट बनाने का जिम्मा सौंपा था। इसकी अनुमानित लागत 50 हजार करोड़ रुपये थी। रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान(डीआरडीओ) ने इसी साल 21 फरवरी को बेंगलुरु में हुए एयरो-शो में इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस जारी किया था। इसका आशय यह है कि तेजस युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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