दादर और नगर हवेली का इतिहास – Dadar and Nagar Haveli History Information

हमारे देश में कुल 7 केन्द्रशासित प्रदेश है। उनमे से ही एक दादर और नगर हवेली – Dadar and Nagar Haveli है। यह केन्द्रशासित प्रदेश महाराष्ट्र और गुजरात के पास में स्थित है। इस दादर और नगर हवेली पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। इसके चारो तरफ से पानी होने की वजह से यह काफी सुन्दर दीखता है। इसकी सुन्दरता को देखने के लिए साल भर पर्यटक यहापर आते रहते है। पिकनिक के लिए यह सबसे उचित जगह है।

दादर और नगर हवेली का प्रदेश बहुत ही सुन्दर है। हरियाली से भरे जंगल, बड़ी बड़ी नदिया, लम्बी लम्बी पर्वत शृंखलाये, विभिन्न जाती के वनस्पति और जिव इस केंद्र शासित प्रदेश की संपत्ति है।

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दादर और नगर हवेली का इतिहास – Dadar and Nagar Haveli History Information

दादर और नगर हवेली पर पोर्तुगिजो का कब्ज़ा था। इसे सन 1779 में पोर्तुगिजो ने कब्जे में कर लिया था और भारत को आजादी मिलने के बाद सन 1954 में इसे भारत में शामिल किया गया था। 1961 तक इस केंद्र शासित प्रदेश पर किसी शासन प्रणाली का नियंत्रण नहीं था और यह स्वयंचलित था।

मगर बाद में उसी साल इसे भारत का केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया। आज संसद के राज्य सभा और लोक सभा में दादर और नगर हवेली के प्रतिनिधि मौजूद है।

दादर औइर सिलवासा इस केंद्र शासित प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर है और सिलवासा इस केन्द्रशासित प्रदेश की राजधानी है।

दादर और नगर हवेली के पूर्व में पश्चिम घाट है, उत्तर और पूर्व में गुजरात के जिले और दक्षिण में महाराष्ट्र के कुछ जिले है। दादर और नगर हवेली के उत्तरपूर्वी दिशा में पश्चिम घाट होने की वजह से यहाँ का थोड़ासा प्रदेश पहाड़ी से बना हुआ है लेकिन इसके बिच में जो हिस्सा है वो बिलकुल मैदान का प्रदेश है और खेती के लिए काफी उपयोगी है।

दादर और नगर हवेली के जिले – Districts of Dadar and Nagar Haveli

दादर और नगर हवेली में 1 जिला, 1 तालुका और 72 गाव मौजूद है।

दादर और नगर हवेली की संस्कृति – Cu।ture of Dadar and Nagar Haveli

दादर और नगर हवेली की संस्कृति काफी समृद्ध है। यहाँ के अधिकतर लोग विभन्न जनजाति से जुड़े है। कोकना, वारली, कोली, धोडिया, काथोडी, नैका और दुबलास यहाँ की सबसे अहम जनजातीया है। यहाँ के हर जनजाति की अपनी अलग संस्कृति है और दुसरो की संस्कृति से बिलकुल अलग है, उनकी प्रथाए भी एक दुसरे से बिलकुल अलग है।

यहाँ के लोगो की अपनी अलग अलग लोककथा और लोक साहित्य है और सभी अपने इस अमूल्य साहित्य को अच्छे से संभालकर रखने की कोशिश करते है। गीत और नृत्य यहाँ के लोगो के संस्कृति का सबसे अहम भाग है और किसी विशिष्ट अवसर पर जैसे की फसल काटने के बाद, शादी के मौके पर और किसी के मरने पर लोग अलग तरह से गीत और नृत्य का प्रदर्शन करते है।

दादर और नगर हवेली के जनजाति के अलावा भी यहाँ पर अन्य धर्मं के लोग भी रहते है। उनके भी अपने अलग त्यौहार है, उनकी भी अपनी संस्कृति है। मगर यहापर 95% हिन्दू धर्म के लोग रहते है।

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दादर और नगर हवेली में बोलि जानेवाली भाषाए – Dadar and Nagar Haveli languages

यहाँ के लोगो की अपनी अपनी अलग भाषा है मगर यहापर अधिकतर भीली और भिलोड़ी भाषा ही बोली जाती है। इंग्लिश यहाँ की आधिकारिक भाषा है मगर यहापर महाराष्ट्र और गुजरात होने की वजह से हिंदी, मराठी और गुजराती भाषा भी बोली जाती है।

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दादर और नगर हवेली का पर्यटन – Tourism of Dadar and Nagar Haveli

सिलवासा में स्थित जनजाति का सांस्कृतिक संग्रहालय पर्यटन का मुख्य आकर्षण केंद्र है, और यहापर भेट देने के बाद में यहाँ की संस्कृति और इतिहास को नजदीक से देखने का मौका मिलता है। इस संग्रहालय में विभिन्न तरह के नकाब, संगीत के अलग अलग वाद्य, मछली पकड़ने के गजेट्स, और अलग अलग पुतले देखने को मिलते है।

खान्वेल से सिलवासा केवल 20 किमी की दुरी पर है। खान्वेल को जानेवाले रास्ते की दोनों तरफ़ से घने जंगल और पेड़ है। इस सुन्दर प्रदेश में सभी तरफ़ हरियाली से भरी पहाड़िया है। यहापर रहने के लिए भी अच्छे तरह के छोटे छोटे घर है। खान्वेल से साकरतोड़ नदी बहती है।

सिलवासा से केवल 5 किमी की दुरी पर वानगंगा झील और सुन्दर आयलैंड गार्डन स्थित है। यहापर पुराने लकड़ी से बनाये हुए पुल, खुबसूरत फुल, जोगिंग की सुविधा, घास से बनायीं हुई छोटी झोपडिया, पहियों से चलायी जाने वाली नाव सबकी यहापर व्यवस्था की गयी है। हनीमून के लिए आने वाले कपल के लिए यह जगह बहुत ही अच्छी है।

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खान्वेल से केवल 20 किमी की दुरी पर दुधनी है जहापर से दमन गंगा नदी बहती है और इस नदी का पानी मधुबन बांध में जाता है। इस नजारे को देखने के बाद कोई भी इस सुन्दर नज़ारे को भूल नहीं सकता। नदी के बाजु में शानदार तम्बू लगाये गए है, उन्हें देखने के बाद किसी गाव के दृश्य की याद आती है।

पर्यटक तम्बू के बाजु में बैठकर आराम से खाना भी बना सकते है। सिलवासा दादर रास्ते पर एक ‘हिरवावन’ बाग लगता है। इस बाग में जोर से बहने वाले झरने, पुराणी पत्थरों से बनायीं हुई दीवारे, जुड़वाँ मेहराब, हरेभरे लॉन देखने को मिलते है।

सिलवासा में वन्धरा उद्यान है यह बाग नदी के पास में ही है। इस बाग में बड़े बड़े लॉन और तम्बू लगाये गए है। यह जगह पिकनिक के लिए सबसे उचित जगह है। सिलवासा में एक छोटासा चिड़ियाघर और बाल उद्यान भी है। यहापर बच्चो के मनोरंजन की सारी सुविधा की गयी है। इस बाग में विभिन्न रंग के पक्षी, बन्दर, अजगर, मगरमच्छ और बच्चो के लिए खेलने की कई सारी चीजे है।

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यहापर आने का सबसे अच्छा समय – Best time to come Dadar and Nagar Haveli

यहापर आने का सबसे अच्छा समय नवम्बर से मार्च महीने के दौरान ही होता है। यहापर गर्मी के दिनों में भी तापमान कम ही रहता है और रात का मौसम भी काफी ठंडा रहता है। दक्षिण पश्चिम का मानसून भी जून से सितम्बर में आता है और इस दौरान यहापर बड़ी मात्रा में बारिश होती है।

 

 

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