दिल्ली अनाजमंडी अग्निकांड : अपनों को तलाशने में पथरा गईं परिजनों की आंखें

रानी झांसी रोड स्थित अनाजमंडी में रविवार सुबह प्लास्टिक फैक्टरी में लगी आग का दिल दहला देने वाला मंजर लोगों को रुला गया। अपनों की तलाश में लोग अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे। शाम ढलते-ढलते इन लोगों की आंखें पथरा गईं। अनहोनी की आशंकाओं से घिरे परिजन अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर फोटो दिखाकर पूछते रहे-कोई तो बताओ ये जिंदा हैं या मर गए। इस हादसे में 43 लोगों की मौत हुई है।

अनाज मंडी से अपनों की तलाश करते-करते दिल्ली गेट के पास स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) पहुंचे 30- 35 लोग बदहवास दिखे। डबडबाई आंखों और मुरझाए चेहरों का सिर्फ एक ही सवाल था-साहब ये देखो मोबाइल फोन पर फोटो। क्या इन्हें यहां भर्ती कराया गया है। प्लीज बता दीजिए। इस अस्पताल के बाहर परिजनों का तांता लगा रहा।
अपने भाई मुशर्रफ की तलाश में पहुंचे बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के युवक भूरा ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से कहा-कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। सबको लकवा सा मार गया है। मुशर्रफ का सुबह पांच बजे के आसपास फोन आया था। वह बोला कारखाने में आग लग गई। मैं आगे कुछ उससे पूछ पाता कि फोन कट गया। सुबह से दिल्ली के तीन अस्पतालों के चक्कर काट चुका हूं। कोई भी कुछ नहीं बता रहा। बोलते हैं ऐसा कोई लड़का यहां नहीं लाया गया। दूसरे अस्पताल में जाओ। एलएनजेपी में घंटों चिरौरी करने के बाद बताया गया कि मुशर्रफ की मौत हो चुकी है।
एलएनजेपी में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को  बिहार के सीतामढ़ी के बुद्धनगर निवासी मुस्ताक भी मिले। उन्होंने कहा- सुबह घर (बिहार) से फोन आया की अनाज मंडी इलाके में आग लग गई है। इसमें रिश्तेदार मोहम्मद आवास नदाफ (33) और नदाफ के ससुर एलु नदाफ (62) निवासी (झिटकी) झुलस गए हैं। दोनों को यहां लाया गया है। मगर कोई नहीं बता रहा कि वो जिंदा हैं या मर गए। अंदर भी नहीं जाने दिया जा रहा।
इस हादसे की सूचना भर से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी इमरान का तो कलेजा ही फट चुका है। वह भी यहां बदहवास होकर बिलखते नजर आए। रोते-रोते गला रुंध गया है। बोले-उनके चार भाई इस फैक्टरी में  काम करते थे। उन्होंने फोन किया था कि आग लग गई है। वह बाहर भाग रहे हैं। वह सीधे फैक्टरी पहुंचे तो वहां बताया कि चारों को एलएनजेपी पहुंचाया गया है। यहां कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं।
 
मौत की नींदः यह कोई पहली घटना नहीं है जिसने सोए हुए लोगों को सुला दिया। दो दशक पहले हुए उपहार सिनेमा घर अग्निकांड को कोई नहीं भूल सकता। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। लगता है उपहार त्रासदी से किसी ने कोई सबक नहीं लिया।

दिल्ली अग्निकांड : फैक्टरी मालिक और मैनेजर गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने रानी झांसी रोड स्थित फिल्मीस्तान के नजदीक अनाज मंडी अग्निकांड के सिलसिले में रविवार शाम फैक्टरी के मालिक रिहान और मैनेजर फुरकान को गिरफ्तार कर लिया। इस फैक्टरी में सुबह लगी आग में 43 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी उत्तरी जिले की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने दी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 (गैरइरातन हत्या) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा रिहान के एक भाई को भी हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है।  रिहान से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने ऊपरी मंजिलों को कितने लोगों को किराये पर दिया था। किरायेदारों की पहचान होने के बाद उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
उधर, अनाज मंडी निवासी अर्जुन कुमार ने बताया कि पहले पूरे इलाके में अनाज का कारोबार होता था लेकिन समय के साथ चीजें बदलती चली गईं। अब यह इलाका सैलून उपकरणों की सबसे बड़ी मार्केट है। पूरे भारत में सैलून के आधुनिक उपकरणों की यहां से आपूर्ति होती है। जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ वहां पर पहले दाल का कारोबार होता था। 10-12 साल पूर्व रिहान के पिता मोहम्मद रहीम ने 600 गज के प्लॉट को खरीदकर वहां पर अपनी फैक्टरी लगाई थी। कुछ साल पहले उनकी मौत हो गई। मरने से पहले रहीम ने प्लॉट को तीन हिस्सों में अपने बेटों शान-ए-इलाही, रिहान और इमरान के बीच बांट दिया।
तीनों भाई रानी झांसी रोड पर ही चिमली वाली गली में रहते हैं। इन लोगों ने कुछ हिस्से को अपने पास रखकर वहां बैग बनाने, पैकिंग करने वाले लोगों को बिल्डिंग का बड़ा हिस्सा किराये पर दे दिया। बड़े-बड़े हॉल में कारखाने वाले ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को रखकर काम करवाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी 600 गज की इस इमारत के तीन हिस्सों में 300 से 350 लोग मौजूद थे। आग लगने वाली इमारत में ही 100 से अधिक लोग थे। हादसे में 43 की मौत हो गई, जबकि 21 लोग जख्मी हो गए।

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