दिल्ली चुनाव: आदर्श आचार संहिता लागू, जानें क्यों लागू होती है?

दिल्ली में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर 8 फरवरी को वोटिंग होगी जबकि 11 फरवरी को नतीजे आएंगे। इसी के साथ दिल्ली में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। आप जानते हैं कि आचार संहिता क्या होती है? यह क्यों लागू की जाती है और कब से कब तक लगी रहेगी? हम आपको इन सभी सवालों के जवाब यहां बता रहे हैं-

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।चुनाव आचार संहिता क्या होती है?

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहते हैं। आचार संहिता नियम और दिशानिर्देश का एक सेट है। इसके माध्यम से यह तय किया जाता है कि चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक पार्टियों को किन गतिविधियों से परहेज करना चाहिए। इसमें भाषण देने से लेकर मतदान वाले दिन, मतदान केंद्र, पोर्टफोलियो, चुनाव घोषणा पत्र, जुलूस और रैली से संबंधित नियम होते हैं। इसका मकसद स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव आयोजित कराना होता है।

कब से लागू होती है आचार संहिता?
आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है। दिल्ली चुनाव की बात करें तो सोमवार को चुनाव आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरी दिल्ली में आचार संहिता लागू हो गई है।
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कब तक लगी रहेगी आचार संहिता?
आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती 11 फरवरी को होगी, इसलिए आचार संहिता 6 जनवरी से 11 फरवरी 2020 तक लगी रहेगी।

पहली बार कब लागू हुआ आचार संहिता?
पहली बार इसका इस्तेमाल 1960 में केरल के विधानसभा चुनावों में किया गया। नियमों का एक छोटा सा सेट तैयार करके पार्टियों को निर्देश दिया गया था। उनको बताया गया था कि चुनाव की घोषणा होने के बाद क्या करें और क्या न करें। उसके बाद 1962 में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में भी इन नियमों को बांटा गया। राज्य सरकारों से आग्रह किया गया कि वे पार्टियों के बीच आचार संहिता को स्वीकार्य बनाए।
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साल 1967 के लोकसभा और राज्य सभा चुनावों में भी आचार संहिता को लागू किया गया। साल 1979 में राजनीतिक पार्टियों से परामर्श के बाद आचार संहिता में एक बदलाव किया गया। सत्ताधारी पार्टी अपनी सत्ता और ताकत का इस्तेमाल करके अनुचित लाभ न उठा ले, इसके लिए एक नया सेक्शन जोड़ा गया। इसके माध्यम से सत्ताधारी पार्टी के लिए कुछ सीमाएं तय की गईं। 1991 में आचार संहिता को मजबूत बनाने के कदम उठाए गए और इसे फिर से जारी किया गया। 1991 में जिस रूप में आचार संहिता को जारी किया गया, वही अब तक चला आ रहा है।

आचार संहिता के माध्यम से क्या रोक लगाई जाती है?
आचार संहिता में आठ प्रावधान किए गए हैं जो सामान्य व्यवहार, बैठकों, जुलूस, मतदान दिवस, मतदान केंद्रों, पर्यवेक्षकों, सत्ताधारी पार्टी और चुनाव घोषणापत्र से संबंधित है।

सोशल मीडिया के लिए क्या है आचार संहिता?
चुनाव आयोग के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का विवरण देना होगा। सोशल मीडिया पर सभी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पहले से सर्टिफिकेट लेना होगा। चुनाव आयोग ने गूगल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप से सभी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों का सत्यापन करने को कहा है।
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विज्ञापन और उसकी सामग्री को लेकर शिकायत दर्ज करने के लिए गूगल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की ओर से एक ग्रीवांस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। किसी भी राजनीतिक पार्टी के पोस्टर और बैनर चुनाव आयोग की मंजूरी के बगैर गूगल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर शेयर नहीं किए जा सकते हैं।
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चुनाव आयोग की मंजूरी के बगैर गूगल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर सरकारी योजनाओं के ऐसे पोस्टर और बैनरों को शेयर नहीं किया जा सकता है जिनमें पीएम, सीएम या किसी मंत्री का चित्र हो।

आचार संहिता के क्या हैं नियम?
आचार संहिता के नियम चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता। सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा। सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा। किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी। किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे।

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आचार संहिता के उल्लंघन पर क्या होता है?
चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि केंद्र और राज्य में सभी पार्टियां आचार संहिता का पालन करे। कई बार कोई पार्टी या उम्मीदवार इन नियमों का उल्लंघन करते हैं। वे चुनाव जीतने के लिए अपराध का सहारा लेते हैं या भ्रष्टाचार करते हैं। वे कई बार मतदाताओं को डराते-धमकाते हैं या फिर पैसा, दारू, कपड़ा और किसी अन्य चीज का लालच देते हैं। इस तरह के उल्लंघन की कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है। चुनाव आयोग उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करता है। उल्लंघन करने वालों को जेल तक की सजा हो सकती है।\

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चुनाव आयोग ने सिविजिल ऐप लॉन्च किया है। इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति आचार संहिता के उल्लंघन को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर सकता है और इसे आगे चुनाव अथॉरिटीज को उपयुक्त कार्रवाई के लिए भेज सकता है।

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