दो हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने किया एक साथ घूमर, इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में हुई दर्ज

अन्तरराष्ट्रीय पुष्कर मेला में महिला सशक्तीकरण की दिशा में जागरुकता पैदा करने के लिए अजमेर जिले ने गुरुवार को पुनः इतिहास रचा। मेले में जिले भर की स्वयं सहायता समूह की दो हजार से अधिक महिलाओं ने एक साथ घूमर नृत्य किया। जिले की यह अनूठी उपलब्धि इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज की गई है।

इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रतिनिधि भानुप्रताप ने जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा को इस उपलब्धि पर इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज होने पर प्रमाण पत्र सौंपा। रूमा देवी एवं पायल जांगिड़ ने की महिलाओं से सीधी बात पुष्कर मेला में गुरुवार को नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त रूमा देवी तथा चैंज मैकर पुरस्कार प्राप्त पायल जांगिड़ ने भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से सीधी बातचीत कर उन्हें अपने अनुभव सुनाएं। बाडमेर जिले की सामाजिक जनचेतना विकास केन्द्र की रूमा देवी ने बताया कि उन्होंने सुई धागा से अपनी यात्रा प्रारम्भ की और आज लगभग 22 हजार से अधिक महिलाएं उनके समूह से जुड़ी हुई है जो अपने परिवार का पालन कर रही है।
उन्होंने बताया कि हर महिला एवं बच्चे के चेहरे पर मुस्कान हो यही उनका प्रयास रहता है। उन्होंने महिलाओं को सीख दी कि हिम्मत के साथ स्वयं को ही आगे बढ़ना होता है। इस मौके पर बाल विवाह एवं बाल श्रम पर कार्य करने वाली अलवर जिले की सरसा गांव की पायल जांगिड़ मात्र 17 वर्ष की है। इन्होंने अपने कार्यों से देश का नाम रोशन किया है। हाल ही उन्हें न्यूयॉर्क में चैंज मैकर पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि पहले उन्हें समाज में तवज्जों नहीं मिलती थी। लेकिन उनके कार्यों के माध्यम से उन्हें पहचान मिली। इसके साथ ही सम्मान से नवाजे जाने के पश्चात समाज ने अपने दिलों में बसा लिया। वे अपना गुरु नोबल पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी को बताती है।

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