नवजात शिशु के लिए कवच है मां का पहला दूध

सही पोषण नवजात शिशु के स्वस्थ जीवन की नींव बनता है। नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद मां का दूध पिलाना बेहद जरूरी है। मां के पहले दूध से मिलने वले कोलेस्ट्रम से नवजात शिशु के कितने लाभ होते हैं, आइए जानते हैं।

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मां का पहला दूध एक प्रकार का टीकाकरण

लोकनायक अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. आशीष जैन का कहना है कि मां का पहला गाढ़ा दूध एकदम सही तापमान पर होता है। उसका गाढ़ापन एकदम सही होता है। उसके अंदर जीवित कोशिकाएं, एंटीबाॅडी आदि भी पाए जाते हैं, जो किसी भी बनावटी दूध में नहीं मिल सकते हैं। यह एक प्रकार का टीकाकरण है, जो बच्चे को बहुत सारे उन इन्फेक्शन से बचाता है, जो बच्चे को प्रथम दिनों में लग सकते हैं।

6 माह तक दें सिर्फ मां का दूध

शिशु को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कर देना कई मायनों में लाभकारी है। शिशु को 6 महीने की आयु तक सिर्फ स्तनपान करवाएं। शिशु को स्तनपान कराना शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए उपयोगी है। बच्चे को घुट्टी देने या अन्य चीजें देने से फायदा भले ही न हो, लेकिन नुकसान अवश्य हो सकता है क्योंकि यदि आप दूध के अलावा कोई और चीज देंगे, तो उससे इन्फेक्शन भी हो जाएगा। यह चीज मां के दूध को डाय्लूट कर देगी। इससे मिलने वाले लाभ भी अपने आप कम हो जाएंगे।

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झक्कास खबर
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मां के दूध में 87 प्रतिशत पानी, बच्चे के लिए होता है कवच

सही पोषण शिशु के स्वस्थ जीवन का आधार है। इसकी शुरुआत होती है जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु को स्तनपान कराने से। मां का पहला गाढ़ा दूध यानी कोलेस्ट्रम नवजात के स्वास्थ्य के लिए कवच का कार्य करता है। दूध में कोई पानी मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि मां के दूध में ही 87 प्रतिशत पानी होता है। जब भी लगे कि बच्चे को प्यास लग रही है तो मां का दूध ही स्तनपान कराया जा सकता है। जन्म से ही शिशु को स्तनपान कराना अनिवार्य है क्योंकि इससे शिशु को सही पोषण मिलता है और उसका स्वस्थ जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।

 

जन्म के 1 घंटे में 44% बच्चे को मिलता है मां का पहला दूध
हाल ही में आई साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या कुछ ही घंटों के भीतर अगर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करायी जाए तो ‘शिशु मृत्यु दर’ काफी कम हो सकती है। हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साल 2017 की रिपोर्ट में पता चला है कि जन्म के 1 घंटे के अंदर मात्र 44 फीसदी बच्चों को ही मां का पहला दूध मिल पाता है।

बच्चे का असली फूड है मां का दूध
ब्रेस्टफीडिंग एक नैचरल प्रोसेस है। बच्चा जैसे ही पैदा होता है, मां के ब्रेस्ट में दूध बनना शुरू हो जाता है और कई महीनों तक बच्चे का यही फूड होता है। हां, बच्चे को सही तरह से फीड करवाने के लिए जरूरी है कि मां को ब्रेस्टफीडिंग का सही तरीका पता हो। दरअसल, सही पॉजिशन को जानकर ही बच्चे को सही तरीके से फीडिंग करवाई जा सकती है।

दो से तीन घंटे में कराएं फीड
गाइनैकॉलजिस्ट डॉक्टर सुरभि मलिक कहती हैं, बच्चे को हर 2 से 3 घंटे पर दूध पिलाती रहें। अगर बच्चा दिनभर में 6 से 8 बार यूरिन कर रहा है, तो समझ लीजिए कि उसकी डायट सही है। हां, जब वह 4 से 6 महीने का हो जाए, तो उसे सॉलिड फूड देना शुरू कर दें।

दूध का बनना, डिमांड व सप्लाई पर निर्भर

अगर आप सोच रही हैं कि बच्चे के लिए आपके पास इतना दूध हो पाएगा या नहीं, तो हम आपको बता दें कि ब्रेस्ट मिल्क का प्रॉडक्शन बहुत हद तक उसकी डिमांड व सप्लाई पर निर्भर करता है। आप बच्चे को जितना फीड करवाएंगी, उतना ही अधिक दूध बनेगा। एक स्टेज के बाद बच्चे का विकास तेजी से होता है, इसलिए जिस बच्चे को पहले 3 घंटे में दूध की जरूरत पड़ती है, बाद में उसे हर 1 घंटे में दूध चाहिए होता है। हां, ऐसे में जरूरी होता है कि आप अपनी डायट की क्वॉन्टिटी बढ़ाने के साथ उसमें न्यूट्रिशंस का भी ध्यान रखें।

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मांओं के लिए ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजय कहते हैं, ब्रेस्टफीडिंग करवाने से महिला हार्ट प्रॉब्लम, डायबीटीज, ऑस्टियोपोरोसिस बीमारियों से बच सकती है। यही नहीं, यह ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी काफी हद तक कम कर देता है। डिप्रेशन को दूर करने में भी यह प्रोसेस बेहद कारगर है। बकौल अजय, फीडिंग करवाते समय महिलाओं की बॉडी से एक हॉर्मोन ऑक्सिटोसिन निकलता है, जिससे वे टेंशन फ्री रहती हैं और अच्छा फील करती है।

स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग

माना जाता है कि बच्चा पूरे जीवन भर पिता से ज्यादा मां के नजदीक इसलिए होता है, क्योंकि मां बच्चे को अपना दूध पिलाकर बड़ा करती है। यही चीज उनके बीच स्ट्रॉग बॉन्डिंग बनाती है। स्टडीज के बाद यह भी पता चला है कि अगर मां बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाती, तो उनके बीच अपनापन का खासा भाव नहीं आ पाता।

 

 

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