नेहरू ने 68 साल पहले आरे में लगाया था पौधा, पढ़े ऐसे तैयार हुआ पूरा जंगल

मुंबई मेट्रो के प्रोजेक्ट के लिए मशहूर ‘आरे’ कॉलोनी में काटे जा रहे पेड़ों पर विवाद जारी है. पिछले एक हफ्ते से मायानगरी की सड़कों पर प्रदर्शन चल रहा है, इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देते हुए पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगा दी है और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है. अगर आरे कॉलोनी के विवाद को देखें तो ये काफी पुराना है फिर चाहे जंगल एरिया हो या फिर इको जोन, इसका इतिहास भी उतना ही रोचक है. इस कॉलोनी की नींव देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी और यहां पेड़ भी लगाया था.

जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी नींव

1947 में देश को मिली आजादी के चार साल बाद 4 मार्च 1951 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पौधारोपण कर डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरे मिल्क कॉलोनी की नींव रखी. PM नेहरू के यहां पौधारोपण के बाद इस इलाके में इतने पेड़ रोपे गए कि 3166 एकड़ क्षेत्रफल में फैले भूभाग ने कुछ ही समय में जंगल का रूप ले लिया.

आरे मिल्क कॉलोनी में मुंबई के कई इलाके आते हैं, जिनमें साई, गुंडगाव, फिल्म सिटी, रॉयल पॉल्म, आरे, पहाड़ी गोरेगांव, पसपोली इलाका शामिल है. इस क्षेत्र में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है, रात में यहां के कुछ रास्तों से निकलने पर रोक भी लगाई गई है.

क्या है मुंबई मेट्रो का प्रोजेक्ट?

मायानगरी मुंबई में सार्वजनिक यातायात की मुश्किलें जाहिर हैं, लोकल ट्रेन के अलावा ऐसा कोई साधन नहीं है जो लाखों यात्रियों का बोझ उठा सके. 2014 में यहां पहली मेट्रो आई तो लोगों को काफी रास आई, जिसके बाद इसके विस्तार की बात छिड़ गई. विस्तार के दौरान जब मेट्रो के शेड की जरूरत हुई तो फिल्मसिटी के बराबर में आरे कॉलोनी के जंगल का चुनाव हुआ, जिसे मुंबई का फेफड़ा कहा जाता है.

शेड के लिए किसी और स्थान पर जगह नहीं मिली तो सरकार की ओर से आरे के पेड़ों में ही शेड बनाने का फैसला हुआ. इसपर मुंबई में आंदोलनों की शुरुआत हुई, आम आदमी से लेकर नेता और अभिनेता हर कोई #SaveAarey का कैंपेन चलाने लगे. मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गया था. लेकिन पहले NGT से भी इजाजत मिली और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसे जंगल मामने से इनकार कर दिया.

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow by Email
Instagram
Telegram