पहली बार में IAS बना पेट्रोल पंप कर्मचारी का लड़का

पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में चिल मत मारो, हमेशा चिल मारकर पढ़ो. साल 2018 में 93वीं रैंक हासिल करने वाले आईएएस प्रदीप सिंह एक इंटरव्यू में अपनी तैयारी का ये ही फंडा बताते हैं.
पेट्रोल पंप में काम करने वाले अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए प्रदीप ने ग्रेजुएशन के बाद पहली बार में IAS बनकर अपने परिवार का नाम ऊंचा कर दिया है. आइए जानें, क्या रही प्रदीप की तैयारी की स्ट्रेटजी, कैसे उन्होंने पहले अटेंप्ट में पाई सफलता.

 

  • पहली बार में IAS बना पेट्रोल पंप कर्मचारी का लड़का, अपनाया था ये फंडा

    प्रदीप सिंह के पिता मूलत: बिहार से हैं. वो साल 1992 में नौकरी करने मध्य प्रदेश आए थे. यहां पेट्रोल पंप पर उन्हें नौकरी मिल गई. इंदौर में ही उनका परिवार रहने लगा. प्रदीप ने भी शुरुआती पढ़ाई इंदौर से की थी, लेकिन वो गांव से भी हमेशा जुड़े रहे. घर में प्रदीप से बड़े उसके भाई संदीप निजी कंपनी में काम करने लगे थे. प्रदीप इंटरव्यू में कहते हैं कि मेरे माता-पिता के साथ साथ भाई ने भी मुझे करियर बनाने में मदद की.

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    प्रदीप ने 10वीं और 12वीं दोनों की परीक्षा CBSE बोर्ड से 80 प्रतिशत से ज्यादा नंबरों से पास की थी. इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए बीकॉम ऑनर्स करने के साथ ही तैयारी शुरू कर दी थी. इसके बाद एक साल तैयारी करके पहले प्रयास में ही परीक्षा पास कर ली. प्रदीप बताते हैं कि सही मायने में मेरा सफर सातवीं और आठवीं कक्षा से ही शुरू हो गया था.

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    वो बताते हैं कि मेरे दादाजी की इच्छा थी कि मैं कुछ ऐसा काम कर सकूं जिससे परिवार का नाम रोशन हो, तभी मैंने तय किया कि अगर आईएएस अफसर बन सकूं तो दादाजी का सपना सही मायने में पूरा हो पाएगा. तभी से मैंने ठाना कि अब मुझे आईएएस ही बनकर दिखाना है. यहां से उन्होंने अपने लिए एक स्ट्रेटजी कुछ इस तरह से तैयार की, आगे पढ़ें.

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    जरूरी है इनवॉल्व होना
    प्रदीप कहते हैं कि मेरा मानना है कि लाइफ में किसी भी चैलेंज को सॉल्व करना चाहते हैं तो उसमें इंट्रेस्ट डेवलप करना बहुत जरूरी है. जब आप किसी भी तरह उस लक्ष्य को पाने के लिए इनवाल्व हो जाते हैं, तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता. मेरी पहले से ही करेंट अफेयर, पॉलिटिक्स आदि में रुचि थी, उसी रुचि को मैंने पूरी तरह अपना पैशन बना लिया लिया. (फोटो: प्रतीकात्मक)

    पहली बार में IAS बना पेट्रोल पंप कर्मचारी का लड़का, अपनाया था ये फंडा

    ऐसे शुरू की तैयारी
    मैंने कॉलेज टाइम से ही तैयारी शुरू कर दी. बेसिक सिलेबस और पहले के पेपर देखना शुरू कर दिया था. पुराने साल के पेपर और यूपीएससी के पैटर्न को परखता रहा. उसके बाद तैयारी शुरू की. मैंने पहले उन विषयों पर तैयारी की जो फार्मूलेटेड होते हैं, जैसे पहले भूगोल, पर्यावरण पर फोकस किया. उसके बाद ऐसे सब्जेक्ट पढ़े जो याद होने वाले थे, जैसे हिस्ट्री में बाद में पढ़ा जो थर्ड इयर में भी याद रहे.

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    लाइफ को जीना जरूरी है
    प्रदीप कहते हैं कि मैंने अपनी लाइफ को पूरी तरह जिया. कॉलेज लाइफ में मैं वहां प्ले और स्टूडेंट पॉलिटिक्स आदि सब करता था. वहां के तीन साल मैंने छह साल की तरह जिये. बस, मैंने कॉलेज की लाइब्रेरी से दोस्ती कर ली थी. समय निकालकर कॉलेज की लाइब्रेरी में कुछ घंटे जरूर बिताता था.

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    भीतर से खुद में जज्ब जरूरी
    आपको अगर आइएएस बनना है तो पहला सवाल अपने आप से करो, कि क्या आप सच में इसे कर पाएंगे. अपने आप से ये पूछें कि क्या आप दो या चार साल दे सकते हो इसके लिए. अगर आपको लगता है कि आप वाकई ये तैयारी कर सकते हैं तो जरूर इस फील्ड में आएं, यहां आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. बाकी ध्यान भटकना भी हरेक की लाइफ में आता है, लेकिन आप उस दौर से कैसे वापस निकलते हैं, ये आपको तय करना है.

    आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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