पांडिचेरी विलय दिवस

पुदुचेरी विलय दिवस प्रत्येक वर्ष भारत में 1 नवंबर को मनाया जाता है। पुदुचेरी या पांडिचेरी लगभग तीन सौ सालों तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा। जनरल डूमा फ्रांसीसी उपनिवेश पांडिचेरी का गवर्नर था। प्राचीन समय में फ्रांस से व्यापार का यह प्रमुख केंद्र था। फ्रांसीसी संस्कृति और वास्तुशिल्प के प्रमाण आज भी यहां कहीं-कहीं दिख जाते हैं। आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

विदेशी आधिपत्य

सम्राज्यवाद व उपनिवेशवाद का विरोध स्वतंत्र भारत की प्रमुख निति थी। इसका स्वाभाविक परिणाम यह था कि भारत अपनी उस जमीन पर फिर से दावा करता, जो विदेशियों के कब्जे में थी। अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी गोवा पर पुर्तगाल का कब्जा था, जबकि पांडिचेरी वर्तमान (पुदुचेरी) पर फ्रांस का आधिपत्य बरकरार था।

भारत में विलय

भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद गोवा व पुदुचेरी के लोगों ने अपनी आजादी व भारत में विलय की मांग प्रारंभ की और इसके लिए आंदोलन प्रारंभ किए। 1954 ई. में पुदुचेरी में माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया। भारत में विलय के लिए व्यापक आंदोलन उठ खड़ा हुआ।मद्रास वर्तमान (चेन्नई) में फ्रांसीसी दूतावास के सामने हर रोज प्रदर्शन होने लगे। नवंबर, 1954 में फ्रांस ने पुदुचेरी को भारत को सौंप दिया, जिसका लोगों ने व्यापक स्वागत किया। सन् 1955 के गणतंत्र दिवस में पहली बार राजपथ पर पुदुचेरी की झांकी निकाली गई। इस तरह पुदुचेरी का शांतिपूर्ण रूप से भारत में विलय  हो गया।

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