पेशवा बाजीराव, जिनके नाम से कांपने लगते थे दुश्मन, जो कभी नहीं हारे

वीरता के किस्सों से भरा हुआ भारत का इतिहास ऐसे ऐसे योद्धाओं की गाथा हमें बताता है, जो हमें सदैव गौरवान्वित करता है. यहाँ एक से बढ़कर एक योद्धा भी हुए, और विद्वान् भी. इस धरती पर कुछ ऐसे वीर सपूतों ने भी जमन लिया जो अपने जीवन काल में कभी हारे ही नहीं. जीतना उनका ध्येय था. और देश के लिए लड़ना उनका धर्म. इसीलिए हम धन्य हैं जो हमें इस पुण्य भूमि पर जन्म मिला.

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ऐसे ही एक वीर योद्धा हुए थे पेशवा बाजीराव, जिनका पूरा नाम था बाजीराव बल्लाल भट्ट. मराठा साम्राज्य में बहुत वीर सपूत हुए हैं. और उन्होंने हमेशा दुश्मनों से डटकर लोहा लिया है. मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा रहे पेशवा बाजीराव भी बहुत बड़े योद्धा थे. और मराठा साम्राज्य का विस्तार करने में इनकी युद्ध नीति और कुशल नेतृत्व का बहुत बड़ा योगदान रहा है.

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मात्र 12 वर्ष की आयु में अपने पिता के नेतृत्व में पहला युद्ध लड़ने वाले बाजीराव ने एक योद्धा और सैनिक के रूप में लगभग 20 वर्षों तक कमान सम्हाली, और इस समयकाल में वो कभी भी नहीं हारे, हर युद्ध में विजय का सेहरा बांधकर ही रणभूमि से वापस लौटे. इनके जीवन के कुछ प्रमुख युद्धों में, सन 1723 में लड़ा गया मालवा का युद्ध, सन 1724 में औरंगाबाद युद्ध, 1724 में ही धर के युद्ध के अलावा पलखेड, भोपाल, फिरोजाबाद, दिल्ली और वसई के युद्ध मुख्य रूप से शामिल हैं.

 

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