बंगाल के ‘कोठारी बंधुओं’ ने विवादित गुम्बद पर लहराया था ‘केसरिया’, भाई ने कहा- शहादत व्यर्थ नहीं गयी

बंगाल की राजधानी कोलकाता के रहने वाले ‘कोठारी बंधुओं’ ने विवादित ढांचे पर ‘केसरिया’ लहराया था। नियमित शाखा जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इन स्वयंसेवकों ने ‘श्रीराम’ के प्रेम की कथा लिखी और आज उनके ‘श्रीराम प्रेम’ की गाथा गाई जा रही है।

अयोध्या श्रीराम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में बड़ा आंदोलन 1990 में हुआ था। 30 अक्टूबर 1990 को विवादित परिसर में बने बाबरी मस्जिद के गुंबद पर कोठारी बंधुओं ने भगवा लहराया था। पुलिस फायरिंग में दोनों भाइयों की मौत हो गई थी। अयोध्या के राममंदिर आंदोलन में कोलकाता के कोठारी बंधुओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कोठारी बंधुओं ने बाबरी मस्जिद पर भगवा झंडा लहराकर पुलिस प्रशासन को चुनौती दिया था। विवादित ढांचे की गुबंद पर चढ़ भगवा लहराकर नीचे उतरने वाले इन कोठारी बंधुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

कारसेवा करने पहुंचे थे अयोध्या
कोलकाता के बड़ा बाजार के रहने वाले रामकुमार कोठारी (23) और शरद कोठारी (24) सगे भाई थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसए से जुड़े थे। नियमित शाखा जाने वाले कोठारी बंधुओं ने वर्ष 1990 के अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में कार सेवा करने का फैसला किया था। उन दिनों अयोध्या में राममंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। राम और शरद कोठारी ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी थी।

दो सौ किमी. चले थे पैदल
अयोध्या जाने से लोगों को रोक दिया गया था। आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आ गए थे। यहां से आगे का रास्ता बंद था। दोनों भाई पैदल ही अयोध्या की ओर निकल गए। 200 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय किया। 25 अक्टूबर को फूलपुर से चले राम और शरद कोठारी 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुंचे।

राम और शरद कोठारी सबसे पहले गुंबद पर चढ़े
राम और शरद कोठारी 30 अक्टूबर को अयोध्या के विवादित परिसर में पहुंचने वाले पहले लोगों में शामिल थे। यहाँ कर्फ्यू था। यूपी पीएसी के करीब 30 हजार जवान अयोध्या में तैनात थे। बावजूद इसके कारसेवकों का जत्था अशोक सिंघल, उमा भारती और विनय कटियार जैसे नेताओं की अगुआई में विवादित परिसर की ओर बढ़ रहा था। 30 अक्टूबर तक अयोध्या में लाखों कारसेवक इकट्ठा थे। विवादित परिसर की बैटिकेंटिंग टूट गयी। कारसेवकों ने ही इसे तोड़ा था। 05 हजार कारसेवक अंदर घुस गए। राम और शरद कोठारी भी इनमें शामिल थे। पुलिस को चकमा देता हुआ शरद कोठारी बाबरी मस्जिद की गुबंद पर चढ़ गया। पीछे-पीछे राम कुमार कोठारी भी गुबंद पर पहुंच गया। फिर विवादित ढांचे की गुबंद पर भगवा लहरा दिया।

पुलिस फायरिंग में मारे गए कोठारी बंधु
30 अक्टूबर को बाबरी मस्जिद की गुबंद पर भगवा लहराने के बाद 02 नवम्बर को दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में हनुमानगढ़ी जा रहे थे। इस बीच पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की फायरिंग से बचने के लिए दोनों लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए। थोड़ी देर बाद घर से बाहर आए और पुलिस की गोली का शिकार होकर वहीं दम तोड़ दिया।

अयोध्या फैसले से ताजी हुई कोठारी बंधुओं की यादें, भाई ने कहा- शहादत व्यर्थ नहीं गयी

अक्टूबर 1990 में विवादित ढांचा विध्वंस के लिए देशभर में एक लहर चली थी और कोलकाता के दो सगे भाई एक दूसरे का हाथ पकड़कर धर्म की राह पर कुर्बानी के लिए एक साथ चल पड़े थे। नाम था राम और शरद कोठारी। दोनों एक साथ रहे, एक साथ चले, एक गिरा तो दूसरे ने उठाया, राम की राह में कुर्बानी देने के नाम दोनों आगे बढ़ते चले गए और विवादित ढांचे पर चढ़कर भगवा ध्वज लहरा दिया था। हालांकि दो नवम्बर 1990 को पुलिस फायरिंग में दोनों शहीद हो गए। आज जबकि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला दे दिया है तो कोलकाता में इन दोनों भाइयों की यादें ताजी हो गई हैं। फैसले के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने उनके परिजनों से मुलाकात की है।

राम और शरद कोठारी के भाई सुभाष कोठारी ने कहा कि कोठारी बंधुओं ने जिस लक्ष्य के लिए धर्म की राह पर कुर्बानी दी, उसका पहला चरण पूरा हो चुका है। उनकी आत्मा को राम मंदिर के इस फैसले से शांति मिलेगी। उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों की शहादत व्यर्थ नहीं गई है।
राम और शरद कोठारी 30 अक्टूबर को अयोध्या के विवादित परिसर में पहुंचने वाले पहले लोगों में शामिल थे। इन्हीं लोगों ने सबसे पहले गुंबद पर भगवा फहराया था। दो दिन बाद दो नवम्बर को दोनों भाई पुलिस फायरिंग में शहीद हो गए।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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