भारत-चीन सीमा: लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिक अब कहां-कहां पर हैं आमने-सामने?

बीते सप्ताह के मुक़ाबले देखा जाए तो इसका मतलब ये है कि गलवान के इलाक़े में मौजूद हॉट स्प्रिंग्स के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 और 15 में दोनों देशों की सेनाएं अब एक दूसरे के आमने-सामने नहीं हैं. इसके बाद अब गलवान के उत्तर की तरफ पैंगोंग झील की तरफ़ सबकी नज़र है.

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डि-एस्केलेशन और डिसइन्गेजमेन्ट में क्या अंतर

डी-एस्केलेशन के विपरीत डिसइन्गेजमेन्ट एक स्थानीय प्रक्रिया है. अब तक संख्याबल के साथ जो सैनिक एक दूसरे के आमने-सामने डटे हुए थे वो अब ऐसा नहीं कर रहे.

सच कहा जाए तो डी-एस्केलेशन एक अधिक पुख्ता और बड़ी प्रक्रिया होती है जो इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि हालात वाकई में सुधर रहे हैं. मौजूदा वक्त में डी-एस्केलेशन के लिए अभी भी काफ़ी कुछ किया जाना बाक़ी है.

लेकिन फिंगर 4 इलाक़े में चीनी सैनिकों की कम हो रही संख्या के बारे में आ रही मीडिया रिपोर्टों को कैसे देखा जाए? ये वो जगह है जिसे पार कर भारतीय सेना आगे पूर्व की तरफ बढ़ती है और फिंगर 8 तक के इलाक़े की पेट्रोलिंग यानी निगरानी करती है.

एक सरकारी सूत्र ने बताया, “चीनी सैनिकों में संख्या यहां कम हुई है लेकिन बाक़ी जगहों पर जैसी सफलता मिली है वो यहां हासिल नहीं हो पाई है. वो लोग पीछे नहीं गए हैं. जितना हम जानते हैं वो शायद अपने सैनिकों को रोटेट कर रहे हैं यानी फिलहाल एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहे हैं.”

पैंगोंग झील इलाक़े में तैनात रह चुके एक अन्य अधिकारी बताते हैं, “फिंगर एरिया में भारतीय और चीनी सेना दोनों के ही कैम्प हैं. और अगर हम चीनी सैनिकों के पश्चिम की तरफ जाने (पीछे जाने) की बात कर रहे हैं तो इस पर तभी यकीन किया जा सकता है जब वो फिंगर 4 पर मौजूद अपने ढांचे नष्ट करें और पीछे जाएं. ऐसा इसलिए कि अगर आप पहले काफी संख्या में सैनिकों को यहां लाएं और फिर कुछ सैनिकों को पीछ हटा लें तो इसका मतलब है कि वहां अब भी पहले के मुकाबले अधिक संख्या में सैनिक मौजूद हैं.”

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देपसांग में क्या है स्थिति

अधिकारी कहते हैं, “सच कहूं तो जब तक दोनों देश किसी एक सीमा पर सहमत नहीं हो जाते, दोनों तरफ़ से सैनिकों को इकट्ठा करना भयावह दिख सकता है. और देपसांग ही क्यों, इस तरह का चीनी निर्माण वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई जगह है और हम भी यही करते हैं. तो इस बात में एक तरह की समानता है.”

वो कहते हैं, “मुझे लगता है इस पूरे मामले को निपटने में कम से कम छह से आठ महीनों का वक्त लगेगा.”

जुलाई 6 के भारतीय बयान के अनुसार, “जल्द से जल्द वास्तविक नियंत्रण रेखा से सैनिकों के डिसइन्गेजमेन्ट और भारत-चीन सीमा पर डी-एस्केलेशन” की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

गलवान इलाक़े से शुरू हुई ये प्रक्रिया अब दूसरे सेक्टर्स में भी हो रही है.

भारत और चीन में इस बात को लेकर सहमति बन गई है कि सीमा विवाद के मामले पर विशेष प्रतिनिधि के तौर पर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत का दौर जारी रहेगा. साथ ही दोनों के बीच सैन्य और राजनयिक अधिकारियों के बीच भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बन गई है.

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गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि “बातचीत के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने गलवान घाटी इलाक़े समेत वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास हाल में हुई घटनाओं के लेकर भारत का रुख़ स्पष्ट किया था. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया था कि सीमा से जुड़े मामलों में भारतीय सैनिक बेहद ज़िम्मेदारी से काम लेते हैं और देश की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है.”

‘भारतीय इलाकों’ से देश की सेना के पीछे हटने को लेकर मीडिया में उठ रहे सवालों पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “डिसइन्गेजमेन्ट की प्रक्रिया और इसके प्रभाव को लेकर हमारी नज़र में कुछ ऐसी टिप्पणियां आई हैं जो गलत हैं और कम जानकारी के आधार पर की गई हैं.”

“हम आपको याद दिलाना चाहते हैं कि बीते कुछ सप्ताह में सरकार ने कई बार बयान जारी कर भारत-चीन सीमा पर वेस्टर्न सेक्टर पर मौजूदा स्थिति को लेकर अपना रुख़ स्पष्ट किया है. इनमें कहा गया है कि गलवान घाटी को लेकर चीन ने जो दावा किया है वो ग़लत है, सीमा के इलाक़े में शांति बनाए रखने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा को आधार मान कर दोनों पक्षों को कड़ाई से सम्मान करना चाहिए और दोनों पक्षों को कोई ऐसा एकतरफा फ़ैसला नहीं लेना चाहिए जिससे इसमें बदलाव होता हो.”

हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि, “कमांडर स्तर पर हुई बातचीत के बाद गलवान घाटी और वेस्टर्न सेक्टर के दूसरे इलाक़ों में भारतीय और चीनी सैनिक डिसइन्गेज करने की प्रभावी कोशिश कर रहे हैं. भारत चीन सीमा पर स्थिति स्थिर है और इसमें सुधार हो रहा है.”

“दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक अधिकारियों की बातचीत के ज़रिए संवाद जारी रखेंगे. साथ ही दोनों पक्षों के बीच कमांडर स्तर की एक और बातचीत भी होगी और भारत-चीन सीमा मामलों पर बनी वर्किंग मेकेनिज़्म फ़ॉर कंस्ल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन की भी बैठक होगी.”

 

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