भारत में हरित क्रांति के जनक सी. सुब्रह्मण्यम

जन्म: 30 जनवरी 1910, कोएम्बटूर, तमिलनाडु

मृत्यु: 7 नवम्बर 2000, चेन्नई, तमिलनाडु

कार्य क्षेत्र: स्वाधीनता सेनानी, राजनेता

चिदंबरम सुब्रमण्यम एक भारतीय राजनेता और स्वाधीनता सेनानी थे। उन्होंने भारत सरकार में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और खाद्य और कृषि मंत्री के तौर पर कार्य किया। बाद में वे महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल भी रहे। भारत के खाद्य और कृषि मंत्री के तौर पर उन्होंने एम.एस.स्वामीनाथन, बी.सिवरमण और नार्मन इ. बोर्लौग के साथ मिलकर भारत में ‘हरित क्रांति’ आरम्भ किया और देश को खाद्यान उत्पादों में स्वावलंबी बनाया। इसी कारण उन्हें ‘हरित क्रान्ति का जनक’ कहा जाता है। 60 और 70 के दशक में देश भयंकर खाद्यान संकट से गुजरा था और इसकी भरपाई दूसरे देशों से आयात के द्वारा पूरी होती थी पर ‘हरित क्रांति’ ने भारत के कृषि की तस्वीर ही बदल दी। उन्होंने किसानों को नयी तकनीकी पर आधारित कृषि करने की सलाह दी जिसका परिणाम ये हुआ कि भारत कृषि उत्पादों में बहुत हद तक स्वावलंबी हो गया।

प्रारंभिक जीवन
चिदंबरम सुब्रमण्यम का जन्म 30 जनवरी 1910 को तमिलनाडु के कोएम्बटूर जिले के सेंगुत्ताईपलायन नामक स्थान पर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोल्लाची में हुई जिसके बाद वे चेन्नई चले गए जहाँ पर उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से फिजिक्स विषय में बी.एस.सी. किया। बाद में उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। अपने कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपने कुछ मित्रों के साथ मिलकर ‘वना मलार संगम’ क स्थापना की। उन्होंने अपने साथ्यों के साथ मिलकर गोबिचेत्तिपलायम (इरोड, तमिल नाडु) में ‘पिथन; नाम से एक पत्रिका भी शुरू की। उनके सहयोगियों में शामिल थे पेरियासामी थूरन, के.एस.रामास्वामी गौंदर, ओ. वी. अलगेसन और न्यायमूर्ति पलनिसामी।

राजनैतिक जीवन
जब चिदंबरम सुब्रमण्यम कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे तब लगभग सारा देश स्वाधीनता आन्दोलन से प्रभावित था और वे भी अपने आप को इससे अलग नही रख पाए। सविनय अवज्ञा आन्दोलन में वे बहुत सक्रीयता के साथ जुड़े रहे। सन 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जेल गए। बाद में उन्हें संविधान सभा का सदस्य चुना गए और उन्होंने भारत के संविधान रचना में भूमिका निभाई। सन 1952 से लेकर सन 1962 तक राजाजी और के.कामराज के नेतृत्व में वे मदरसा राज्य में शिक्षा, कानून और वित्त मंत्री रहे। इस दौरान वे मद्रास विधान सभा में सदन के नेता रहे। सन 1962 में वे लोक सभा के लिए चुने गए और केंद्र में इस्पात और खनन मंत्री बनाये गए। तत्पश्चात उन्हें केंद्र सरकार में खाद्य और कृषि मंत्री बनाया गया। 2 मई 1971 से लेकर 22 जुलाई सन 1972 तक उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष का कार्यभार संभाला।

चिदंबरम सुब्रमण्यम और हरित क्रान्ति
एम.एस.स्वामीनाथन, बी.सिवरमण और नार्मन इ. बोर्लौग के साथ चिदंबरम सुब्रमण्यम भी भारत में हरित क्रांति के मुख्य वास्तुकार थे। आधुनिक तकनीकी और पद्धति पर आधारित इस कार्यक्रम के कारण सन 1972 में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार हुई। खाद्य और कृषि मंत्री के तौर पर उन्होंने किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज, रासायनिक उर्वरक और विज्ञानिक पद्धति पर आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार ‘हरित क्रान्ति’ से अनाज उत्पादन में वृद्धि हुई और भारत खाद्यानों में स्वावलंबी बन गया।

उन्होंने ही कृषि वैज्ञानिक एम.एस.स्वामीनाथन की नियुक्ति की जिन्होंने ‘हरित क्रांति’ में मुख्य भूमिका निभाई। जब भारत में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘श्वेत क्रान्ति’ की शुरुआत हुई तब उन्होंने वर्घिस कुरियन को ‘नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड’ का अध्यक्ष बनाया। वर्घिस कुरियन के अनुसार ‘चिदंबरम सुब्रमण्यम ने श्वेत क्रांति में जो भूमिका निभाई उसका उल्लेख ज्यादा नहीं होता’। सुब्रमण्यम ने नेशनल एग्रो फ़ोन्दतिओन की भी स्थापना की।

वित्त मंत्री और आपातकाल
सन 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ तब उन्होंने इंदिरा गाँधी का साथ दिया और इंदिरा गाँधी के धड़े वाले कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये गए। बाद में उन्हें इंदिरा गाँधी सरकार में वित्त मंत्री बनाया गया। वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने इंदिरा गाँधी को रुपये का अवमूल्यन करने की सलाह दी। वे आपातकाल के दौरान भी देश के मंत्री थे। आपातकाल के बाद वे इंदिरा गाँधी को छोड़कर कांग्रेस के दूसरे धड़े में शामिल हो गए।

सन 1979 में उन्हें चौधरी चरण सिंह सरकार में भारत का रक्षा मंत्री बनाया गया। सन 1990 में उन्हें महाराष्ट्र राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया पर पी.वी. नरसिंह राव सरकार के कार्य करने के तरीके की आलोचना करने के बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।

सम्मान और पुरस्कार
सन 1998 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाज़ा गया
वाय. वी. चौवान राष्ट्रिय एकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया
सन 1996 में यू. थांत शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया
सन 1996 में नार्मन इ. बोर्लौग पुरस्कार दिया गया
सन 1988 में अनुव्रत पुरस्कार दिया गया
अगस्त 2010 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक सिक्का जारी किया

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)

1910: 30 जनवरी तो जन्म हुआ
1952-62: मद्रास राज्य में शिक्षा, क़ानून और वित्त मंत्री के तौर पर कार्य किया
1962: लोक सभा के लिए चुने गए जिसके बाद इस्पात और खनन मंत्री बनाये गए
1965: केंद्र सरकार में कृषि मंत्री बने जिसके बाद ‘हरित क्रान्ति’ की शुरुआत हुई
1969: कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद इंदिरा गाँधी का समर्थन किया
1971-72: योजना अयूग का उपध्यक्ष बनाये गए
1975: आपातकाल के दौरान भारत के वित्त मंत्री रहे
1990: महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाये गए
1998: सरकार ने उन्हें भारत रत्न से नवाज़ा
2000: 7 नवम्बर को चेन्नई में निधन हो गया

 

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