भारत हाइपरसोनिक मिसाइल टेक क्लब में शामिल

भारत ने सोमवार को हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफल परीक्षण किया। यह स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। इस सफल परीक्षण के साथ ही रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने अत्यधिक जटिल प्रौद्योगिकी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जो अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक व्‍हीकल्‍स के निर्माण में मददगार साबित होगी। अगले पांच से छह वर्षों में अपेक्षित, वे मैक 5 से ऊपर की गति से उड़ने में सक्षम होंगे।

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केवल कुछ मुट्ठी भर देशों, जैसे अमेरिका, रूस और चीन ने अब तक इस हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। और अब भारत इस क्लब में शामिल हो गया। भविष्य की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए, इसकी उपयोगिता के अलावा, इसमें कम लागत पर उपग्रहों को लॉन्च करने सहित कई नागरिक अनुप्रयोग हो सकते हैं।

– भारत ने किया एचएसटीडीवी का सफल परीक्षण, देखें वीडियो

स्क्रैमजेट इंजन रैमजेट इंजन पर एक सुधार है क्योंकि पूर्व हाइपरसोनिक गति पर कुशलता से संचालित होता है और सुपरसोनिक दहन की अनुमति देता है। रामजेट्स (ब्रह्मोस को लगता है), इसके विपरीत, मैक 3 के आसपास सुपरसोनिक गति पर अच्छी तरह से काम करते हैं। हालांकि, उनकी दक्षता हाइपरसोनिक गति पर गिरती है। पिछले साल जून में अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के ठोस रॉकेट मोटर द्वारा संचालित हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का पहला प्रक्षेपण विफल हो गया था। हालांकि, ओडिशा के बालासोर में एपीजे अब्दुल कलाम परीक्षण रेंज (व्हीलर द्वीप) से सोमवार का परीक्षण सफल रहा।

जाने क्या है हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल?

एचएसटीडीवी (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल) हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट के लिए मानव रहित स्क्रैमजेट प्रदर्शन विमान है, जो विमान 6126 से 12251 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़े, उसे हाइपरसोनिक विमान कहते हैं। भारत के एचएसटीडीवी का परीक्षण 20 सेकंड से भी कम समय का था। एक बार इसमें सफलता मिल जाएगी तो भारत ऐसी तकनीक हासिल करने वाले देशों के चुनिंदा क्लब में शामिल हो जाएगा। इस विमान का उपयोग मिसाइल और सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए हो सकता है। इस्तेमाल कम लागत पर उपग्रह लॉन्च करने के लिए भी किया जा सकता है।

भारत बना चौथा देश

चीन, अमेरिका, रूस हाइपरसोनिक विमान का सफल परीक्षण कर चुके हैं, चीन ने हाल ही में अपने पहले हाइपरसोनिक (ध्वनि से तेज रफ्तार वाले) विमान शिंगकॉन्ग-2 या स्टारी स्काय-2 का सफल परीक्षण किया है। चाइना एकेडमी ऑफ एयरोस्पेस एयरोडायनेमिक्स ने चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कारपोरेशन का डिजायन किया यह विमान परमाणु हथियार ले जाने और दुनिया की किसी भी मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली को भेदने में सक्षम है। हालांकि सेना में शामिल होने से पहले इसके कई परीक्षण किए जाएंगे। अमेरिका और रूस भी हाइपरसोनिक विमान का परीक्षण कर चुके हैं।

– भारत ने किया एचएसटीडीवी का सफल परीक्षण, देखें वीडियो

 

ब्रह्मोस से दोगुनी होगी ब्रह्मोस-2 मिसाइल की रफ्तार

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रूस के अत्‍याधुनिक S-500 एयर डिफेंस सिस्‍टम के अलावा किसी भी देश के पास हाइपरसोनिक मिसाइलों का रोकने की क्षमता नहीं है। इस तकनीकी की मदद से अब भारत एंटी शिप मिसाइलें बना सकेगा। ये घातक म‍िसाइलें पलक झपकते ही शत्रुओं के एयरक्राफ्ट कैरियर को तबाह कर देंगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ब्रह्मोस-2 नाम से एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहा है। रूस के मदद से तैयार ब्रह्मोस मिसाइल अभी सब सोनिक स्‍पीड (ध्‍वनि से तीन गुना ज्‍यादा रफ्तार) से वार करती है। इस तरह ब्रह्मोस-2 अपने पूर्ववर्ती मिसाइल से दोगुना ज्‍यादा रफ्तार से वार करेगी।

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सबसे बड़ी नौसेना बनाने में जुटा हुआ है चीनी ड्रैगन

लद्दाख में भारतीय जमीन पर आंखे गड़ाए बैठा चीन बहुत तेजी से अपनी नौसैनिक क्षमता बढ़ा रहा है। चीन के पास जल्‍द ही तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हो जाएंगे। इसके अलावा चीन के पास बड़े पैमाने पर डेस्‍ट्रायर, फ्रीगेट्स और अत्‍याधुनिक सबमरीन का बेड़ा है। इसके अलावा चीन अपनी नौसेना के लिए कई घातक हथियार बनाने में जुटा हुआ है। चीन ने हाल ही में लंबी दूरी तक मार करने वाली डीएफ-27 मिसाइलों का परीक्षण किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइलों को बनाने से चीन की टेंशन कई गुना बढ़ जाएगी।

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भारत के शत्रु पाकिस्‍तान को युद्धपोत दे रहा चीन

चीन न केवल अपनी ताकत बढ़ा रहा है, बल्कि भारत के धुर विरोधी पाकिस्तान की नौसेना को घातक युद्धपोत और सबमरीन दे रहा है। चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव में चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर एक अहम हिस्सा है, दोनों देशों के बीच सैन्य हथियारों को लेकर भी कई डील हुई हैं। यही नहीं चीन पाकिस्‍तान के ग्‍वादर में विशाल नेवल बेस बना रहा है। अब चीन के हुडॉन्ग-झॉन्गहुआ शिपयार्ड ने पाकिस्तानी नौसेना के लिए बनाया टाइप-054AP श्रेणी का मल्टिपर्पज स्‍टेल्‍थ फ्रीगेट भी लॉन्च कर दिया है। ये फ्रीगेट रेडार को चकमा देने में भी सक्षम है। पाकिस्‍तान की नौसेना के पास इस समय केवल नौ फ्रीगेट्स, पांच सबमरीन और 10 मिसाइल बोट और तीन माइनस्‍वीपर हैं।

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पाक को चीन दे रहा किलर पनडुब्‍बी, दूर तक करेंगी वार

चीन से मिल रहे युद्धपोत से पाकिस्‍तानी नौसेना बेहद घातक हो जाएगी। ये युद्धपोत 4000 समुद्री मील तक हमला कर सकते हैं और इन पर जमीन से हवा और सबमरीन रोधी मिसाइलें लगी हुई हैं। पाकिस्‍तान को ये हथियार 2021-23 के बीच मिल जाएंगे। पाकिस्‍तान को मिलने वाली चीनी युआन क्‍लास की पनडुब्‍बी दुनिया में सबसे शांत मानी जाने वाली पनडुब्‍ब‍ियों में से एक है। इन 8 में से 4 वर्ष 2023 पाकिस्‍तान को मिल जाएंगी। डीजल इलेक्ट्रिक चीन की इस पनडुब्बी में ऐंटी शिप क्रूज मिसाइल लगी होती हैं। यह पनडुब्बी एयर इंडिपैंडेंट प्रपल्शन सिस्टम के कारण कम आवाज पैदा करती है जिससे इसे पानी के नीचे पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। पाकिस्तानी नौसेना ने हाल में ही अपनी एक पनडुब्बी को चीनी नौसेना के युद्धपोतों के बीच कराची में सुरक्षा के लिए तैनात किया था।

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रूस की सबसे घातक मिसाइल पर आधारित है ब्रह्मोस-2

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हाइपरसोनिक मिसाइल की दुनिया में सबसे आगे रूस चल रहा है। रूस ने अपनी 3M22 जिरकॉन मिसाइल को तैनात करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की ब्रह्मोस-2 मिसाइल भी जिरकॉन पर आधारित है। डीआरडीओ अगले पांच साल में स्‍क्रैमजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर सकता है। इसकी रफ्तार दो किलोमीटर प्रति सेकेंड से ज्‍यादा होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्‍च किया जा सकते हैं। आम मिसाइलें बैलस्टिक ट्रैजेक्‍टरी फॉलो करती हैं। इसका मतलब है कि उनके रास्‍ते को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। इससे दुश्‍मन को तैयारी और काउंटर अटैक का मौका मिलता है जबकि हाइपरसोनिक वेपन सिस्‍टम कोई तयशुदा रास्‍ते पर नहीं चलता। इस कारण दुश्‍मन को कभी अंदाजा नहीं लगेगा कि उसका रास्‍ता क्‍या है। स्‍पीड इतनी तेज है कि टारगेट को पता भी नहीं चलेगा। यानी एयर डिफेंस सिस्‍टम इसके आगे पानी भरेंगे।

 

 

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