मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

कोरोना काल में बेरोजगारी की ऐसी मार पड़ रही है कि डिग्री धारक मज़दूर बन गए हैं. डिग्री लेकर अच्छा जीवन जीने का सपना संजोए युवाओं के जीवन को कोरोना ने झकझोर दिया है.

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मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी
डिग्री धारक इन युवाओं के हाथों में अब फावड़ा आ गया है.
मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

डिग्री लेकर भी उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं था. परिवार और अपना पेट पालने के लिए अब युवाओं ने गांवों में मनरेगा का दामन थामा है. एक दिन के काम के लिए युवा 201 रुपये  कमाते हैं.

मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

हजारों रुपये की पगार पाने का सपना देखने वाले ये डिग्री धारक युवा आज कोरोना काल में मात्र कुछ सौ रुपये में अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं.

मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

मेरठ के परीक्षितगढ़ गांव में सूरज निकलते ही कुछ युवक मनरेगा के तहत मजदूरी करते दिखे. इन मजदूरों में खास बात यह थी कि इनमें से कोई बीए है तो कोई बीकॉम, कोई एमए की पढ़ाई कर रहे हैं.

इसी गांव का रहने वाला अंकित भी बीकॉम किए हुए हैं और वह एमए की पढ़ाई कर रहे थे. पिता की तबीयत खराब हुई तो मजदूरी करने आ गए. उनका कहना है कि अगर आर्थिक स्थिति से जूझ रहे हैं तो कोई भी काम बुरा नहीं होता. वह पुलिस में जाना चाहते थे लेकिन अब शायद उन्होंने यह सपना छोड़ दिया है.

वहीं एक और शख्स जिनका नाम वीरेंद्र है. वह भी ग्रेजुएट हैं और काफी सालों से मजदूरी कर रहे हैं. हालांकि वह संतुष्ट नहीं है लेकिन मजबूरी के तहत ही इस काम को कर रहे हैं. नौकरी नहीं मिली तो मेहनत मजदूरी ही करने लगे. कई सारे एग्जाम दे चुके हैं लेकिन नौकरी नहीं लगी. घर में 6 लोग हैं और सभी का जिम्मा वीरेंद्र के कंधों पर ही है. उसने अपनी बहनों की भी शादी की है.

मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

गांव के प्रधान राजपाल सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में युवाओं की हालत खराब हो गई थी. बहुत सारे लोग उनके गांव के हैं जो पढ़े-लिखे हैं और अब मजदूरी का काम कर रहे हैं.

मनरेगा में फावड़ा चला रहे बीए-एमए डिग्री धारक, 201 रुपये रोज है मजदूरी

वहीं, एडीओ पंचायत बाबूराम नागर का कहना है कि मनरेगा के तहत जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया उनको वह काम दे रहे हैं. जो लोग पढ़े-लिखे हैं और डिग्री धारक हैं उनके लिए भी वह जिला उद्योग केंद्र से और आईटीआई से बात कर रहे हैं और उसके लिए फॉर्मेट भी तैयार किया गया है. उनके फॉर्म भरवाए जा रहे हैं. जाे मजबूरी के तहत मजदूरी का काम कर रहे हैं. उनको उनके हिसाब से ही रोजगार मिल जाए, जिसकी व्यवस्था की जा रही है.

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