लॉकडाउन में गरीबों को नहीं बुलाया तो कोटा के संपन्न छात्रों के लिए क्यों भेजी बस : नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के छात्र-छात्राओं और दिहाड़ी मजदूरों से अपील की है कि वह लॉकडाउन का पालन करें और जो लोग जहां हैं वहीं पर ठहरे रहें. जाहिर है राजस्थान के कोटा में बिहार के कई छात्र रह रहे हैं. ये सभी वहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करते हैं. लेकिन लॉकडाउन की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं और छात्र वापस बिहार आने की छटपटाहट में हैं. नीतीश कुमार ने इन्हीं छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखते हुए यह बात कही है.

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सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘कोटा में पढ़ने वाले छात्र संपन्न परिवार से आते हैं. अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को साथ रहते हैं, फिर उन्हें क्या दिक्कत है. जो गरीब अपने परिवार से दूर बिहार के बाहर हैं फिर तो उन्हें भी बुलाना चाहिए. लॉकडाउन के बीच मे किसी को बुलाना नाइंसाफी है. इसी तरह मार्च के अंत में भी मजदूरों को दिल्ली से रवाना कर लॉकडाउन को को तोड़ा गया था.’

बिहार के सीएम नीतीश कुमार का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने 200 से भी ज्यादा बसें राजस्थान के लिए रवाना की है. जिससे कि वहां पढ़ रहे यूपी के छात्रों को वापस लाया जा सके.

जाहिर है कोटा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले ज्यादातर छात्र संपन्न परिवार से आते हैं. इसलिए उन्हें खाने या रहने संबंधी किसी संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है. जबकि देश के कई हिस्सों में ऐसे लाखों मजदूर फंसे हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी मयस्सर नहीं हो रही है. लेकिन अब तक लॉकडाउन की वजह से सभी को रोक कर रखा गया है.

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नीतीश कुमार ने अपने बयान में कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे मजदूर, छात्र-छात्राओं, ठेले वाले और रिक्शा वालों को राहत पहुंचाने के लिए बिहार सरकार उन राज्य सरकारों से समन्वय बनाकर उनकी मदद करने की कोशिश कर रही है.

नीतीश कुमार ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में लॉकडाउन समाज के व्यापक हित में है और कोविड-19 पर लगाम लगाने के लिए यह सबसे प्रभावी रास्ता है. नीतीश ने कहा कि लोग अगर सामाजिक दूरी बनाने का पालन ठीक से करेंगे तो वह खुद को, अपने परिवार और समाज को इस बड़ी विपत्ति से बचा पाएंगे. नीतीश ने कहा इस बीमारी पर काबू पाने के लिए सामाजिक दूरी बनाना ही सबसे प्रभावी उपाय है.

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