लोकगीतों के सम्राट पं. देशराज पटेरिया को सदा याद रखेगा बुंदेलखंड

बुन्देलखण्ड, उत्तर प्रदेश का वह भाग जो न सिर्फ ऐतिहासिक परिदृश्य से महत्वपूर्ण है, बल्कि संगीत के लिए भी विशेष रूप से पहचान रखता है। इसी पहचान को दिन-प्रतिदिन लोकगीतों के द्वारा शिखर तक पहुंचाने वाला एक सितारा इस दुनिया से विदा ले चला। बुन्देलखण्ड के प्रख्यात लोकगीत सम्राट पं. देशराज पटेरिया अब हमारे बीच नही रहे। लेकिन, खास बात यह है कि स्व. पटेरिया की विधा हमेशा हमारे बीच हमेशा मौजूद रहेगी।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

 

बुन्देली लोकगीतों के माध्यम से लोगों को बांध कर रखने की उनमे विशेष कला थी। उरई में उनके दर्जनो कार्यक्रम हो चुके हैं। उनके कार्यक्रमो में उनके नाम से ही भीड़ जुट जाती थी और जब तक वह मंच पर मौजूद रहते थे तब तक श्रोता व दर्शक अपनी कुर्सी से टस से मस नही होते थे।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

बुन्देली लोकगीत, संगीत के चमकते सितारे थे पटेरियाः कुमुद

लोककला विशेषज्ञ अयोध्या प्रसाद कुमुद का कहना है कि, ‘बुन्देली लोकगीत, संगीत को आमजन और घर-घर तक पहुंचाने वाले प्रसिद्ध बुन्देली गीत, संगीत गायक देशराज पटेरिया के निधन से बुन्देलखण्ड के एक चमकते सितारे व एक युग का अंत हो गया। श्री कुमुद जी आगे कहते हैं, ‘बुन्देली लोकगीत व संगीत को आमजन के बीच मे लोकप्रिय बनाने मे देशराज पटेरिया की विशेष भूमिका रही है। वे कई बार उरई आए। उरई से उनका विशेष लगाव था। बुन्देली लोगों मे उनकी क्षति हमेशा बनी रहेगी।’

देशराज की अनूठी शैली ने लोकगीतों को दिलाई प्रसिद्धिः साबिर

बुन्देलखण्ड के मोहम्मद रफी के नाम से मशहूर मिर्जा साबिर वेग ने कहा कि,:महान बुन्देली गायक देशराज पटेरिया के कारण बुन्देली गीत, संगीत को नई ऊंचाई मिली। पहले बुन्देली लोकगीत, संगीत केवल गांव तक सीमित था। देशराज पटेरिया के कारण बुन्देली लोकगीत गांव से शहर तक लोगों के बीच प्रसिद्ध हुए। उनकी गायकी की एक अनूठी शैली थी। जिससे दर्शक सोता, मंत्रमुग्ध हो जाता था। जब वह लाला हरदौल का चित्रण अपनी गायकी से करते थे तो सैकड़ों महिला पुरूषों की आंखे नम हो जाती थी।

बुन्देली लोक गायकी पद्य्मश्री देशराज से हुई मशहूरः निरंजन

प्रख्यात गायक व संगीतकार राजेश निरंजन ने कहा कि, ‘देशराज पटेरिया बुन्देली लोक गायकी के चर्चित नाम थे। सही कहा जाए तो पूरे देश मे बुन्देली लोक गायकी उनके कारण ही मशहूर हुयी। वे संत राजेश्वरानंद सरस्वती (राजेश रामायणी) के पिता प्रसिद्ध लोक गायक अमरदान के शिष्य थे। उन्होने बुन्देली लोकगायकी को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया। हम लोग संत राजेश्वरानंद सरस्वती के साथ भी देशराज पटेरिया के साथ कई मंचो पर रहे है। उन्हें पदमश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।

बुन्देली गायकी में सभी रसों का होता था अद्भुत सम्मिश्रण: डा. मिर्जा

प्रसिद्ध गायकार डा. शगुफ्ता मिर्जा का कहना है कि, ‘बुन्देली लोकगीत के पहले कैसेट बने और वह खूब पॉपलर हुए। बाद में, इसके एलबम भी बने। वह बुन्देली लोकगीत सम्राट देशराज पटेरिया की ही देन है। उनके कारण ही बुन्देली गायकी मे रैप और पॉप गीत संगीत का चलन वढ़ा। सबसे बड़ी बात यह है कि अपनी गायकी मे श्रृंगार, हास्य, व्यंग और करूण रस का बहुत अच्छा प्रयोग करते थे।’

डा. मिर्जा ने आगे बताया कि, ‘उन्होने बुन्देली लोकगीत को इतना पॉपलर किया है। उनका नाम सुनते ही हजारों श्रोताओं, दर्शकों की भीड़ कार्यक्रम स्थल तक पहुंच जाती थी। हमने बुन्देली लोकगायकी का एक बहुत बड़ा कलाकार खो दिया है। हम उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

देशी लोक गायक देशराज पटेरिया का निधन

 

बुंदेली लोकगीतों के सम्राट कहे जाने वाले देश के जाने माने लोक गायक और बुंदेलखंड की माटी के लाल प. देशराज पटेरिया का बीती रात हृदय गति रुकने से दुःखद निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे, उनका जन्म 25 जुलाई 1953 में छतरपुर के नौगांव कस्बे के पास तिटानी गाँव में हुआ था। वह अपने पीछे पत्नि, एक पुत्र विनय पटेरिया को छोड़ गए है। वह पिछले  चार दिनों से छतरपुर के मिशन अस्पताल में भर्ती थे। जानकारी के अनुसार बुधवार को देशराज पटेरिया को दिल का दौरा पड़ा था। जिसके बाद इलाज के लिए उन्हें चिकित्सकीय संरक्षण में रखा गया था। इलाज के दौरान शनिवार की सुबह 3.15 बजे उन्हे पुनः दिल का दौरा पड़ा और उनकी हृदय गति रुक गई। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को 11 बजे भैंसासुर मुक्तिधाम में होगा।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

बुंदेली भाषा में लोकगीतों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान देने वाले गायक देशराज पटेरिया बुंदेलखंड के प्रसंशकों के लिए उनका निधन क्षतियुक्त एवं दुःखद खबर है। देश विदेशों में अपनी लोक गायकी का लोहा मनवाने वाले देशराज पटेरिया की आवाज जब छतरपुर आकाशवाणी केन्द्र से गूंजती थी तो ग्रामीण बुंदेलखंड ही नहीं पूरे देश के लोग उनके भक्ति, वीर, श्रृंगार रस का अदभुत सम्मेलन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था। स्वर्गीय देशराज पटेरिया प्रसिद्ध पाश्व गायक मुकेश कुमार को अपना आदर्श मानते थे।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

देशराज पटेरिया ने 1976 से लोकगीत गाना शुरू किया था। उनके द्वारा गाए गए गीत उठो “धना बोल गओ मगरी पै कौवा…. चली गोरी मेला को”, “साइकिल पै बैठ कै, चला रहे जीजा जी मूंछैं दोउ ऐंठ कै” सहित सैकड़ों गीत आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं। वही हरदौल और राधेश्याम रामायण के उनके गायन का आनंद लोग आत्ममुग्धता से करते थे। देशराज पटेरिया के दुःखद निधन से मध्य प्रदेश ही नहीं पूरे देश ने एक ऐसे लोक गायक को खो दिया है जिसकी पूर्ति करना असंभव सा है।

 

 

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow by Email
Instagram
Telegram