सत्र से पहले UP विधानसभा में धरने पर बैठे सपा विधायक

-नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) वापस लेने और गन्ना क्रय मूल्य बढ़ाने की मांग
शीतकालीन सत्र शुरू से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने मंगलवार सुबह विधानभवन स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे हैं। इस दौरान अपने हाथों में संविधान बचाओ-देश बचाओ, गन्ना खरीद मूल्य बढ़ाने, नागरिकता संसोधन कानून वापस लेने आदि लिखी तख्तियां अपने हाथों लेकर सरकार के विरोध में नारेबारी कर रहे हैं।
सपा विधायकों का कहना है कि देशभऱ में नागरिकता कानून संशोधन के विरोध में हिंसा हो रही है, लेकिन केंद्र व प्रदेश की सरकार सो रही है।
धरने पर बैठे सपा के एमएलसी और विधायकों का कहना है कि देश और प्रदेश की सरकार एक क्रूर शासक की तरह व्यवहार कर रही है। चारों तरफ लोग बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त हैं, लेकिन सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लाकर अपने विध्वंसकारी कानून से देश के वर्तमान को हिंसा की आग में झोंक दिया है। जब छात्रों ने इसका विरोध किया तो बर्बरता के साथ पुलिस ने उस पर लाठियां भांजी।
सपा विधायकों ने कहा कि जब लोग हारने लगते हैं तो वे दमनकारी हो जाते हैं। भाजपा जैसी सत्ता की भूख भारत के इतिहास ने पहले कभी नहीं देखी। नौजवानों का भाजपा के इस अन्याय के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध संवैधानिक है। भाजपा को संविधान और नागरिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
विधायकों ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली, नदवा कॉलेज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ ज्यादती की निंदा की और छात्र-छात्राओं के अपमान तथा उत्पीड़न को लोकतंत्र की हत्या बताया। 
सपा विधायकों ने कहा कि सरकार ने गन्ना क्रय मूल्य न बढ़ाकर गन्ना किसानों के साथ धोखा दिया है। सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने की घाेषणा की थी लेकिन यहां तो उनकी लागत भी आना मुश्किल हो जाएगा। खाद और अन्य कृषि कार्य महंगा हो गया लेकिन गन्ना मूल्य का एक रुपये भी न बढ़ाया जाना किसानों के साथ अन्याय है।
अखिलेश यादव ने किया ट्विट
इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर जामिया मिलिया में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई को बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से पूछा है कि क्या यही गुजरात मॉडल है?
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, “जिस प्रकार जामिया मिलिया के छात्र-छात्राओं से बर्बरतापूर्ण हिंसा हुई है और विद्यार्थी अभी भी फंसे हुए हैं, ये बेहद निंदनीय है। पूरे देश को हिंसा में फूंक देना ही क्या आज के सत्ताधारियों का असली ‘गुजरात मॉडल’ है।”

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