साईं बाबा की समाधि केे 100 साल पूरे, शिरडी में 1918 में ली थी समाधि

शिरडी महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले की राहटा तहसील का एक क़स्बा है। यहां दुनियाभर से साईं बाबा के भक्त उनके दर्शन के लिए आते हैं। दरअसल, शिरडी में साईं बाबा का समाधि मंदिर है। कई श्रद्धालु यहां समाधि पर चादर चढ़ाते हैं।

यह समाधि सवा दो मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी है। गुरुवार के दिन भक्तों का तांता बहुत अधिक रहता है। समाधि मंदिर के अलावा यहाँ द्वारकामाई का मंदिर चावडी और ताजिमखान बाबा चौक पर साईं भक्त अब्दुल्ला की झोपड़ी है। साईं बाबा ने शिरडी में यहीं 1918 में समाधि ली थी।

साई बाबा की समाधि के 100 साल पूरे हो चुके हैं। दशहरे पर ही साई बाबा ने समाधि ली थी। इसीलिए साई बाबा के मंदिर में 17 से 19 अक्टूबर तक खास समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। खास बात ये है कि इस साल इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरडी पहुंचे जहां उन्होने खास पूजा अर्चना की। आइए आपको बताते हैं शिरडी और साईं बाबा से जुड़ी कुछ खास बातें।

जन्म कहां हुआ किसी को नहीं मालूम

साईं बाबा का जन्म कब और कहां हुआ ? इसके बारे में प्रमाणिक जानकारी आज तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। मान्यता है कि महज 16 वर्ष की उम्र में साईं बाबा शिरडी आए थे और फिर वहीं रहने लगे। ताउम्र फकीर की तरह जीवन यापन कर उन्होंने श्रद्धा और सबूरी का संदेश दिया। उनका मत था ‘सबका मालिक एक है’।

महासमाधि लेने का कारण

कहते हैं कि दशहरे के कुछ दिन पहले ही साईं बाबा ने अपने एक भक्त रामचंद्र पाटिल को विजयादशमी पर ‘तात्या’ की मृत्यु की बात कही। तात्या बैजाबाई के पुत्र थे और बैजाबाई साईं बाबा की परम भक्त थीं। तात्या, साईं बाबा को मामा कहकर संबोधित करते थे। इस तरह साईं बाबा ने तात्या को जीवनदान देने का निर्णय लिया।

27 सितंबर 1918, साईं बाबा के शरीर का तापमान बढ़ने लगा। उन्होंने अन्न,जल सब कुछ त्याग दिया।

बाबा के समाधिस्त होने के कुछ दिन पहले तात्या की तबीयत इतनी बिगड़ी कि जिंदा रहना मुमकिन नहीं लग रहा था। लेकिन उसकी जगह साईं बाबा 15 अक्टूबर, 1918 को अपने नश्वर शरीर का त्यागकर ब्रह्मलीन हो गए। उस दिन विजयादशमी(दशहरा) का दिन था।

शिरडी में ही बिताया सारा जीवन
महाराष्ट्र के अहमदनगर में मौजूद शिरडी गांव में ही साईं बाबा आजीवन रहे। यहां वो 16 साल की उम्र में आए थे और समाधि लेने तक यहीं रहें। और लोगों की सेवा की।

जन्म के बारे में नहीं कोई प्रमाण
साईं बाबा के जन्म को लेकर कोई प्रमाण मौजूद नहीं है और ना ही कोई जानता है कि उनका जन्म कब और कहां हुआ। 16 साल की उम्र में शिरडी आए साईं बाबा ने अपना सारा जीवन शिरडी में ही बिताया। और 1918 मेें समाधि ली।

साईं बाबा मंदिर की है खास मान्यता
शिरड़ी में साईं बाबा का बड़ा मंदिर बना है जहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में आने वाला चाहे अमीर हो या गरीब, कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

नीम के पेड़ के नीचे बिताए 5 साल
साईं बाबा ने शिरडी में एक नीम के पेड़ के नीचे करीब 5 साल बिताये, इस दौरान उन्होंने जंगलों में सन्यासी का जीवन बिताया।

आज 100 दीपकों से होगी आरती
आज दशहरा है और इसीलिए आज खास कार्यक्रमों का आयोजन शिरड़ी में किया जा रहा है। शिरड़ी में आज रात करीब 9.30 बजे 100 दीपकों की रौशनी शिरड़ी में की जाएगी और साईं बाबा की आरती उन्ही 100 दीपकों से होगी।

पीएम मोदी आज पहुंचेंगे शिरड़ी
साईं बाबा की समाधि को 100 साल हो गए हैं इस मौके पर आज पीएम मोदी शिरडी पहुंचे और खास पूजा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां मंदिर की विजिटर बुक में अपने विचार भी लिखे।

— कहते हैं कि दशहरे के कुछ दिन पहले ही साईं बाबा ने अपने एक भक्त रामचंद्र पाटिल को विजयादशमी पर ‘तात्या’ की मृत्यु की बात कही। तात्या बैजाबाई के पुत्र थे और बैजाबाई साईं बाबा की परम भक्त थीं। तात्या, साईं बाबा को मामा कहकर संबोधित करते थे। इस तरह साईं बाबा ने तात्या को जीवनदान देने का निर्णय लिया। 27 सितंबर 1918, साईं बाबा के शरीर का तापमान बढ़ने लगा। उन्होंने अन्न, जल सबकुछ त्याग दिया। बाबा के समाधिस्त होने के कुछ दिन पहले तात्या की तबीयत इतनी बिगड़ी कि जिंदा रहना मुमकिन नहीं लग रहा था। लेकिन उसकी जगह साईं बाबा 15 अक्टूबर, 1918 को अपने नश्वर शरीर का त्यागकर ब्रह्मलीन हो गए। उस दिन विजयादशमी (दशहरा) का दिन था।

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

 

 

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