साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी सुदर्शन सिंह

सुदर्शन सिंह चक्र (अंग्रेज़ी: Sudarshan Singh Chakra, जन्म: 4 नवम्बर, 1911 – मृत्यु: 25 सितम्बर, 1989) महान् भक्त हृदय साधक, साहित्य सेवी, एक अनूठे दार्शनिक एवं सिद्ध संत थे। जहां एक ओर उन्होंने कल्याण पत्रिका के सम्पादकीय विभाग में अनेक वर्षों तक भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार के सान्निध्य में रहकर धार्मिक पत्रकारिता के अनेक आदर्श मानदण्ड स्थापित किए, वहीं धार्मिक, आध्यात्मिक विषयों पर 80 से ज़्यादा पुस्तकें लिखकर साहित्य-साधना की।

जीवन परिचय
सुदर्शन सिंह चक्र का जन्म 14 नवम्बर, 1911 को काशी क्षेत्र के भेलहटा गांव के एक कृषक रामकिशोर सिंह के घर हुआ था। युवावस्था में सन् 1929 में वे कोलकाता चले गए। वहां उन्होंने एक अंग्रेज़ी कम्पनी में काम करना शुरू किया। स्वदेशी अभियान से प्रभावित होकर एक दिन वे विशुद्ध खादी के वस्त्र पहनकर कार्यालय गए। अंग्रेज़ अधिकारी ने चिढ़कर उन्हें तुरन्त नौकरी से हटा दिया। उन्होंने व्रत लिया था कि वे ग़ुलाम देश में विवाह नहीं करेंगे। अप्रैल 1930 में चन्दौली (काशी) क्षेत्र में उन्होंने नमक आन्दोलन के संचालन में सक्रिय भाग लिया। चन्दौली में भांग व शराब की दुकान की घेराबंदी करते हुए जेल भेजे गए। कई बार सत्याग्रह कर जेल गए। वे काशी में संत-महात्माओं के सम्पर्क में आए तथा अपना जीवन धर्म और भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। स्वामी अखण्डानंद सरस्वती, प्रभुदत्त ब्रह्मचारी आदि के निकट सम्पर्क में आए और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना-साधना में लगे रहे।

साहित्यिक परिचय
उन्होंने 1931 से 1941 तक धार्मिक मासिक “संकीर्तन’ तथा कई वर्षों तक “मानस मणि’ तथा ‘श्रीकृष्ण सन्देश’ पत्रिकाओं का सम्पादन किया। जयदयाल डालमिया की प्रेरणा पर सुदर्शन सिंह चक्र जी ने श्री रामचरित, श्री शिवचरित, श्रीकृष्णचरित, श्रीहनुमानचरित जैसे ग्रंथ लिखे। असंख्य ऐतिहासिक तथा धार्मिक कहानियां लिखकर उन्होंने धार्मिक साहित्य के भण्डार में अभिवृद्धि की। शुक्रताल तीर्थ में हनुमद्धाम की स्थापना में सहयोग किया। वे श्रीकृष्ण के साथ-साथ हनुमानजी के भी परम उपासक थे।

निधन
25 सितम्बर, 1989 को वे ब्रह्मलोक प्रयाण कर गए। उनके द्वारा रचित धार्मिक साहित्य युग-युगों तक नैतिकता की प्रेरणा देता रहेगा।

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