(हमीरपुर बुलेटिन) युवक का शव फांसी के फंदे पर मिला, 24 घंटे में महिला समेत दो लोगों ने की खुदकुशी, पढ़ें दिनभर की खबरें

1- चाचा पर गोली चलाने वाले हिस्ट्रीशीटर अपराधी को फिल्मी अंदाज में पुलिस ने दबोचा

-हिस्ट्रीशीटर के साथ दरोगा की फोटो सोशल मीडिया में वायरल होने पर लोगों ने किये कमेंट
हमीरपुर । जनपद में अवैध असलहा के साथ एक युवक को दबोचने वाले दरोगा की फोटो बुधवार को सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। लोग इस पर कमेंट भी कर रहे है। इस पर अपने ही सगे चाचा पर फायरिंग करने का आरोप है। फिलहाल इसे जेल भेजा गया है। पुलिस टीम को पुलिस अधीक्षक ने प्रशस्त पत्र देकर सम्मानित किया है।
राठ कोतवाली के इंस्पेक्टर केके पाण्डेय ने आज बताया कि राठ कस्बे के दीवानपुरा मुहाल निवासी रिंकू यादव हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। इसने अपने ही चाचा बालकिशन पर फायर कर दिया। लेकिन चाचा बच गया। गोली बाल किशन के बगल से किल गयी। चाचा को मारने के लिये ये हिस्ट्रीशीटर दोबारा अवैध तमंचा लोड कर रहा था तभी कस्बे के चौकी इंचार्ज एसआई शाहजहां अली सिपाही रोहित साहू व राजेश यादव के साथ मौके पर पहुंच गये और उसे पकड़ा लिया।
 पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जमीनी विवाद में हिस्ट्रीशीटर ने अपने चाचा पर फायर किया था। तभी नजदीक एक मामले की जांच कर रही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हिस्ट्रीशीटर को अवैध असलहा और कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस सराहनीय कार्य के लिये पुलिस टीम को प्रशस्त पत्र देकर सम्मानित किया गया है।
 इधर सोशल मीडिया में हिस्ट्रीशीटर अपराधी के साथ दरोगा की फोटो वायरल होने पर लोगों ने कमेंट किये है। बताते है कि प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस नवनीत सिकेरा ने सोशल मीडिया में हिस्ट्रीशीटर को पकड़े दरोगा की फोटो वायरल होने पर गजब का कमेंट किया है। उन्होंने दरोगा पर तंज किया है कि स्टंट का इतना ही शौक था तो फिल्मों में ट्राई मारते। कसम से र्म्बाे की याद दिला दी है।

2- बुन्देलखंड की आन और शान है आल्हा-ऊदल, वीरता की गाथायें सन फड़क उठती है भुजायें

हमीरपुर । बुन्देलखण्ड में सैकड़ों साल पुरानी परम्परा का गांव-गांव निर्वहन होने से यह पता चलता है कि आल्हा-ऊदल की वीरता आज भी लोगों के दिलों में समाई हुई है। जोश भरने वाली वीरता की गाथा सुनकर युवा, वृद्ध समेत सभी लोगों की भुजायें फड़क उठती है। रक्षाबंधन के अगले दिन इन्हीं दोनों की वीरता से सम्बन्ध रखने वाला कजली मेला मनाये जाने की परम्परा कोरोना वायरस महामारी के कारण टूट सी गयी है। सामाजिक दूरी के बीच ग्रामीण इलाकों में ये कार्यक्रम सिर्फ रस्म अदायगी तक सीमित होंगे।
आल्हा गायक दिनेश कुमार ने बताया कि सैकड़ों साल पहले रक्षाबंधन के दिन राजा पृथ्वीराज चौहान ने महोबा में हमला कर दिया था। उनकी सेना ने रानी मल्हना के डोले लूट लिये थे तब वीर भूमि के लोगों ने इस त्यौहार को रद्द कर दिया था। इस एतिहासिक घटना के बाद आल्हा-ऊदल ने पृथ्वीराज चौहान की सेना से मोर्चा लेकर लूटे गये डोले वापस लाये थे।
 इसीलिये उस दिन रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया गया था। लूटे गये कजली से भरे डोले वापस मिलने के बाद महोबा के कीरत सागर में रानी मल्हना ने रक्षाबंधन के अगले दिन कजलियों का विसर्जन कर रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया था। इस दिन जलेबी घर-घर खाने की परम्परा भी है। बहनें भाईयों के हाथों में रक्षा सूत्र बांधती है। कजली लेकर महिलायें सावन गीत व कजली गीतों के साथ तालाबों में विसर्जन करती है। जगह-जगह आल्हा-ऊदल की वीरगाथा आल्हा के माध्यम से गाये जाती है।
आल्हा गायक ने बताया कि बुन्देलखण्ड में रक्षाबंधन व कजली महोत्सव के दौरान यदि आल्हा न सुनाई पड़े तो सावन, मनभावन नहीं लगता है। लोग महोबा के दो महान वीर आल्हा-ऊदल की वीरता की गाथा बड़े ही उमंग से सुनते है और बुन्देलखण्ड की वीरता पर गर्व महसूस भी करते है। इस तरह आल्हा-ऊदल की वीरता आज भी यहां के लोगों के दिलों में बसी है। महोबा के साथ ही हमीरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में आगामी मंगलवार होने वाले यह परम्परागत कार्यक्रम महज रस्म अदायगी के लिये होंगे।
राजा परमाल के दरबारी कवि थे आल्ह खंड के रचयिता 
यहां के आल्हा गायक दिनेश कुमार ने बताया कि जिस खण्ड काव्य को सुनकर लोगों की भुजायें फड़क उठती है उसकी रचना करने वाले महान कवि जगनिक थे जो शूरवीर सेनापति व मंत्री भी थे। वह आगरा या फतेहपुर के नहीं बल्कि महोबा के ही रहने वाले थे। आजकल के आल्हा गायक आल्ह खण्ड को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करते है जिससे लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पाती है। उदाहरण के तौर पर आल्ह खण्ड के रचयिता महाकवि जगनिक को आगरा या फतेहपुर का निवासी बताया जता है जबकि वास्तविकता यह है कि जगनिक महोबा के ही रहने वाले थे। वे राजा परमाल के दरबारी कवि थे। आल्हा-ऊदल उन्हें मामा कहते थे।
 मूलरूप से कवि जगनिक आल्हा-ऊदल के ननिहाल के रहने वाले थे। आल्हा गायक ने बताया कि आल्ह खण्ड सैकड़ों सालों से शोध का विषय बना हुआ है। जगनिक के नाम और ग्राम पर भ्रांति बनी है। लोगों ने जगन, जागन, जगनायक आदि नामों से भी कवि को प्रस्तुत किया है। शोधकर्ता ने भले ही अलग-अलग नाम दिये हो मगर पृथ्वीराज रायसो, परमाल रायसो, वीर विलास, बालभट्ट विलास में कई बार जगनिक का नाम आया है। जगनिक ग्राम घटहरी छतरपुर मध्यप्रदेश के निवासी थे जो महोबा के एक मुहल्ले में रहते थे। यह मुहल्ला भी जगनिक के नाम से प्रसिद्ध रहा है।
160 वर्षों पुरानी परम्परा का कजली, दंगल मेला रद्द
रक्षाबंधन त्यौहार के अगले दिन हमीरपुर शहर के रमेड़ी रहुनियां मुहाल में 160 सालों से अनवरत होने वाला कजली, दंगल मेला कोरोना संक्रमण के फैलने के कारण रद्द कर दिया गया। दंगल आयोजक एवं भाजपा नेता राजीव शुक्ला एडवोकेट ने बुधवार को बताया कि उनके पूर्वजों के जमाने से यहां कजली मेला और दंगल का आयोजन होता आ रहा है लेकिन इस बार कोरोना के कारण यह एतिहासिक आयोजन रद्द करने का फैसला किया गया है।
उन्होंने बताया कि हमीरपुर शहर में भी कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दे दी है लिहाजा ऐसे में इस पुरानी परम्परा के आयोजन को सामाजिक लोगों की सहमति पर नहीं कराया जायेगा। भाजपा नेता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 4 अगस्त को हमीरपुर और अन्य स्थानों पर लगने वाले दंगल और कजली के त्यौहार पर रोक लगायी जाये जिससे कोरोना महामारी पर नियंत्रण पाया जा सके। बता दे कि शहर के इस स्थान पर इस एतिहासिक कजली मेला और दंगल को देखने के लिये कई गांवों से भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती थी। इसमें नामी गिरामी पहलवानों की कुश्तियां भी होती थी।

3- सच्चे अर्थों में समाजसेवी थे ईश्वर चन्द्र विद्यासागरः डा.भवानीदीन

हमीरपुर । सुमेरपुर कस्बे में वर्णिता संस्था के तत्वाधान में जिनका देश ऋणी है कार्यक्रम के तहत बुधवार को समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की पुण्यतिथि पर साहित्यकारों ने श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया।
वर्णिता संस्था के अध्यक्ष एवं साहित्यकार डा.भवानीदीन ने ईश्वर चन्द्र विद्यासागर को श्रद्धांजलि देते हुये कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर सच्चे अर्थों में समाज उत्थान के अगुआकार थे। वह निर्धन होकर भी दया के सागर थे। लोकसेवा उनके रोम रोम में बसी हुई थी। ईश्वर चंद का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर के वीर सिह गांव में ठाकुर दास बंदोपाध्याय के घर 26 सितंबर 1820 को हुआ था। मां का नाम भगवती देवी था।
इन्होंने कोलकाता के संस्कृत कॉलेज में पढ़ना प्रारंभ किया। यह पढ़ने में बहुत मेधावी थे। संस्कृत कॉलेज ने इन्हें विद्यार्थी जीवन में ही प्रतिभा को देखते हुए विद्यासागर की उपाधि दे दी थी। तत्पश्चात यह उपाधि इनके जीवन के साथ जुड़कर उपनाम बन गई। 1840 से लेकर 1855 तक ईश्वरचंद्र अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न पदों पर रहे। विद्यासागर स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने अनेक विद्यार्थियों, सैकड़ों विधवाओं तथा अनेक लोगों को मदद देकर आर्थिक संकट से उबारा था। समाज सुधार इनकी पहली रुचि थी। वे विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे।
 जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से 1865 में विधवा पुनर्विवाह को वैध कराकर कानून पास कराया। जो स्त्री समाज की एक बहुत बड़ी सेवा थी। ईश्वर चंद्र विद्यासागर एक प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षा विद, समाज सुधारक, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक और परोपकारिता के प्रतीक थे। वे अपने जीवन के अंतिम 20 वर्षों में बिहार के जामताड़ा जिले के आदिवासियों के कल्याण के लिए उनके बीच रहे। इसीलिए उनके निवास का नाम नंदनकानन रखा गया था। राजा राममोहन राय के बाद समाज सुधार के क्षेत्र में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का स्थान आता है। विधवा पुनर्विवाह के लिए विद्यासागर ने जो आंदोलन किया था। वह अपने आप में अविस्मर्णीय और प्रशन्सनीय था।
 ईश्वरचंद ने लगभग 25 विधवाओं का पुनर्विवाह कराया। नारी शिक्षा के लिए विद्यासागर ने बहुत प्रयास किए, इन्होने 35 स्कूल खुलवाये। ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने 52 पुस्तकें लिखी, जिनमे 17 पुस्तकें सन्सकृत मे,पांच पुस्तकें अन्ग्रेजी भाषा मे और शेष बन्गला मे लिखी, इनका सादगी भरा जीवन रहा। अन्ततः इस महान समाज सुधारक  का निधन 29 जुलाई 1891 को हो गया,उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम में अवधेश कुमार गुप्त एडवोकेट,राजकुमार सोनी सरार्फ, पिन्कू सिन्ह, विजय चौरसिया,लल्लन गुप्ता और प्रांशु सोनी मौजूद रहे।

4- युवक का शव फांसी के फंदे पर मिला, 24 घंटे में महिला समेत दो लोगों ने की खुदकुशी

हमीरपुर । कुरारा कस्बे के मनकी स्टैण्ड के पास हाइवे किनारे एक युवक का शव बुधवार को घर में फांसी के फंदे में झूलता पाया गया। घटना की सूचना पाते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा है। इससे पहले हमीरपुर शहर में एक महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।
कुरारा कस्बे के मनकी स्टैण्ड के पास रमाकांत सिंह का मकान स्थित है। उसके पुत्र अरुणेश सिंह उर्फ गुड्डा (30) का शव फांसी के फंदे पर लटकता मिला है।
 गुड्डा दो बच्चों का पिता था। रक्षाबंधन त्यौहार मनाने के लिये पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गयी थी। इस घटना से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिये भिजवाने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना पर पत्नी और बच्चे भी मौके पर आ गये है। पति का शव देख पत्नी बदहवाश है। बता दे कि इससे पहले हमीरपुर शहर के रमेड़ी मुहाल में जीवेश अवस्थी की पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।

5- बच्चे स्कूल नहीं जा रहे है तो कैसे जमा होगी बोर्ड परीक्षा की फीसः शिक्षक नेता

-बोर्ड परीक्षा की फीस जमा करने की तिथि आगे बढ़ाने के लिये शिक्षक महासभा ने की मांग
हमीरपुर । कोरोा संक्रमण काल में सूबे के समस्त विद्यालय बंद चल रहे है वहीं माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश जरिये कक्षा 10 व 12 के विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा फीस जमा किये जाने की तिथि 5 अगस्त निर्धारित कर दी गई है। जब बच्चे स्कूलों में नहीं आ रहे है तो फीस भी जमा नहीं हो रही हैै तब शिक्षा परिषद को फीस कैसे जमा हो सकेगी।
यह बात वित्त विहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष बृजेश श्रीवास्तव ने बुधवार को शाम कुरारा कस्बे में शिक्षकों के बीच कही। उन्होंने बताया कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों का शिक्षक पहले से ही विगत पांच महीनों से वेतन ना मिलने के कारण भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है। जिससे वह सिर्फ जीवित है विद्यालय खुल नहीं रहे हैं। और बच्चे आ नहीं रहे हैं कोचिंग भी पूरी तरह बंद चल रही हैं। जिससे शिक्षकों की आय के स्रोत पूरी तरह बंद हो चुके हैं। वहीं सरकार द्वारा ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने का फरमान जारी किया गया है।
लेकिन ग्रामीण अंचलों में बच्चों द्वारा दी जा रही मामूली फीस तो मिल नहीं पाती है वही वह एंड्रॉयड फोन कहां से खरीदेंगे यह सोचनीय विषय है। वहीं कुछ राजकीय तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों द्वारा उक्त व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन उसके भी परिणाम शून्य आ रहे हैं। सिर्फ मोबाइल ग्रुप में फोटो खींच कर डाल देने से ही ऑनलाइन पड़ाई नहीं हो जाती है जो की चिंता का विषय है।
अब एक माह बीत आ जा रहा है। लेकिन विद्यालय बंद होने के कारण कहीं भी कक्षाएं चालू नहीं हो सकी हैं। कोर्स पिछ्र डता जा रहा है। जिससे इतने कम समय में भरपाई करना संभव नहीं होगा वही विद्यालयों के खोले जाने संबंधी कोई निर्देश नहीं प्राप्त हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में जहां अभिभावक भी विद्यालयों के खोले जाने की तिथि का इंतजार कर रहे हैं वहीं छात्रों की स्थिति तो और ज्यादा खराब हो रही है। कोर्स पूरा ना होने के कारण उनका प्रदर्शन भी परीक्षा में खराब हो सकता है।
 उन्होंने बताया कि विद्यालय खोले जाने की व्यवस्था को लेकर शासन व विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाएं तथा बोर्ड परीक्षा व पंजीकरण का शुल्क जमा किए जाने की तिथि को आगे बढ़ाया जाए जिससे कोई भी विद्यार्थी परीक्षा एवं पंजीकरण से वंचित न रह सके । शिव शरण सिंह यादव प्रभात तिवारी नारायण दीक्षित राजेश पाठक संजीव पाठक अनिरुद्ध पांडे गौरव श्रीवास्तव सहित दर्जनों शिक्षक मौजूद रहे।

 

 

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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