(हमीरपुर बुलेटिन) सीएए को लेकर कांग्रेस तैयार कर रही देश में अराजकता का माहौल – बाबूराम निषाद, पढ़े दिनभर की खबर

1- सीएए को लेकर कांग्रेस तैयार कर रही देश में अराजकता का माहौल- बाबूराम निषाद
-सीएए व एनआरसी के विरोध में खड़े राजनैतिक दलों को सांसद ने भी लिया आड़े हाथ 
एनआरसी और सीएए एक्ट के विरोध को लेकर सोमवार को आयोजित निंदा बैठक में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री व उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग एवं वित्त विकास निगम के अध्यक्ष बाबूराम निषाद ने कहा कि यह कितना दुर्भाग्य का विषय है कि गांधी जी ने वर्ष 1947 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2003 में हिन्दु और सिक्खों को भारतीय नागरिकता देने की बात की थी और वही उनकी कांग्रेस पार्टी इस एक्ट को लेकर देश में अराजकता का माहौल तैयार कर रही है।

इस दौरान भाजपा सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल ने कहा कि पाकिस्तान और बंगलादेश से लुट पिटकर शरण मांगने वाले शरणार्थियों में सबसे ज्यादा संख्या दलितों की है। इसके बावजूद दलित वादी होने का दंभ भरने वाली कुछ पार्टियां दलित शरणार्थियों की नागरिकता का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि सीएए और एनआरसी से भारत में रहने वालों को कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सांसद हमीरपुर स्थित एक गेस्टहाउस में नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) को लेकर चल रहे आन्दोलन की निंदा बैठक में कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस एक्ट के बारे में भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे में हम सभी को इस एक्ट के बारे में सत्य और तथ्यात्मक रूप से आम आदमी तक पहुंचाने की कोशिश मिलकर करनी होगी। ताकि आम आदमी असलियत से परिचित हो सके।
भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने कहा कि सीएए और एनआरसी के बारे में समझाने के लिये कार्यकर्ता अब घर-घर जायेंगे और विपक्षी दलों के फैलाये गये भ्रम को खत्म कर उन्हें असलियत से परिचित कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है न कि छीनने के लिए। लेकिन कुछ विपक्षी दल इस कानून की गलत व्याख्या कर भ्रम फैला रहे है और अल्पसंख्यक वर्ग को भड़का कर देश में हिंसा कराने का काम कर रहे है।

2 – नवजातों को सर्दी से बचाने में कारगर कंगारू- मदर केयर

– मौसम को देखते हुए नवजात शिशुओं का रखें ध्यान
– इस मौसम में कोल्ड डायरिया और निमोनिया का होता है खतरा 
जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ/एसएनसीयू प्रभारी डॉ.सुमित ने सोमवार को बताया कि नवजात शिशुओं को सर्दी के मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। खासतौर से ऐसे नवजात शिशु जिनका वजन 2.5 किग्रा से कम है, उनके लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) संजीवनी साबित होती है। इससे जहां बच्चे का तापमान सामान्य रहता है वही वजन भी तेजी से बढ़ता है, व सर्दी के खतरों से नवजात शिशु महफूज रहते हैं।

वह बताते है कि सर्दी की वजह से तापमान रोज नीचे आ रहा है। न्यूनतम तापमान 7 डिग्री तक पहुंच चुका है। इन हालातों में सबसे ज्यादा खतरा नवजात शिशुओं (शून्य से 27 दिन) को होता है, नवजात शिशुओं की देखरेख में जरा भी हीलाहवाली उन्हें बीमार कर सकती है। नवजात शिशुओं के लिए कंगारू केयर बेहतर विकल्प होता है। इसके लिए अस्पताल में अलग से वार्ड भी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कमजोर शिशु को मां के सीने से चिपकाकर रखा जाता है। गंभीरता की स्थिति में आमतौर पर चौबीस घंटे में 6 से 8 घंटे तक भी बच्चों को रखा जा सकता है। वही सामान्य शिशु को सर्दी के मौसम में प्रतिदिन कम से कम एक घंटे जरूर इस तरह से रखा जाना चाहिए।
केएमसी से वजन बढ़ा, बची जान
सदर तहसील के जलाला भटपुरा गांव के शिवकांत की पत्नी मिथलेश ने 15 नवंबर को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। एक बच्चे की जन्म के 13 वें दिन मौत हो गई थी और दूसरे को गंभीर हालत में 29 नवंबर को जिला अस्पताल के एस एन सी यू वार्ड में भर्ती कराया गया था। वार्ड के प्रभारी डॉ सुमित ने बताया कि बच्चे का वजन 865 ग्राम था। लगातार सघन निगरानी की गई। प्रतिदिन केएमसी भी करवाया गया। जिससे बच्चे खतरे से बाहर आ गया। सोमवार को बच्चे का वजन 1215 ग्राम हो चुका है। उन्होंने बताया कि केएमसी से बहुत फायदा हुआ है। बच्चे के अभिभावक भी खुश है कि कम से कम उनके बच्चे की जान बच गई वरना वे बे औलाद हो जाते।
क्या है कंगारू मदर केयर- 
जैसे कंगारू अपने बच्चे को गर्माहट देकर उसकी आधी तकलीफें दूर करता है, ठीक ऐसे ही माएं भी अपने नवजात को अपने से चिपकाकर उसे गर्माहट देती हैं जिससे बच्चे की कई समस्याएं दूर हो जाती है।
केएमसी से होने वाले लाभ- 
इस तकनीक के जरिए त्वचा का संपर्क शिशु को शांत रखने और नवजात शिशु को संभालने में मां के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होता है। केएमसी की मदद से नवजात शिशु का तापमान में सुधार होता है। यह एक तरह का मानवीय एवं प्राकृतिक इनक्यूबेटर की तरह काम करता है। इससे मां के हार्माेन सक्रिय रहते हैं, जिससे दुग्ध आपूर्ति में वृद्धि होती हैं। त्वचा से त्वचा का संपर्क मां को रिलेक्स करता है और लंबी अवधि में इससे प्रसव के बाद होने वाले डिप्रेशन की संभावना भी कम हो जाती है। यह तरीका सस्ता हैं, घर में भी किया जा सकता हैं और इससे नवजात में संक्रमण होने की संभावना कम रहती हैं। इस प्रक्रिया को माँ के अलावा कोई भी कर सकता हैं।
3- एनीमिया और टीबी मुक्त भारत अभियान में तेजी लाएंः सीएमओ

नवनियुक्त  मुख्य चिकित्साधिकारी ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की
शासन की प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचे
नव नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.राजकुमार सचान ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद सोमवार को विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने शासन की प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य योजनाओं को पारदर्शिता के साथ चलाने के निर्देश दिए। टीबी और एनीमिया मुक्त भारत अभियान में गति लाने के साथ-साथ आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के कार्ड शत-प्रतिशत एक्टिवेट कराए जाने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने कहा कि केंद्र सरकार का सपना है कि सन 2025 तक भारत को टीबी मुक्त किया जाए। इस अभियान में ढिलाई नहीं होनी चाहिए। सघन टीबी खोजी अभियान (एसीएफ) के दौरान जहां भी टीबी के नए मरीज मिलते हैं उनका उपचार किया जाए और उन्हें निरूशुल्क दवाएं मुहैया कराएं। टीबी रोगियों की एचआईवी की भी जांच समय-समय पर कराते रहें। टीबी रोगियों को एचआईवी होने की ज्यादा संभावना रहती है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कड़े निर्देश दिए कि जनपद में कोई भी प्राइवेट डॉक्टर अगर किसी टीबी मरीज का उपचार करता है तो उसका पूरा ब्योरा दर्ज करके स्वास्थ्य विभाग को भी मुहैया कराए। वरना ऐसे डॉक्टरों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि शासन की जो भी स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं चल रही हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया जाए। अंतिम पायदान पर बैठे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का आसानी से लाभ दिया जाए।आयुष्मान भारत योजना के जितने भी कार्ड जारी हुए हैं, उन्हें एक्टिवेट किया जाए ताकि लाभार्थियों को इस योजना का आसानी से लाभ मिलता रहे। बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.महेशचंद्रा ने विभाग की अभी तक की उपलब्धियों की जानकारी दी। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. रामअवतार ने भी इस कार्यक्रम को लेकर चल रही तैयारियों की जानकारी दी।  मुख्य चिकित्सा अधिकारीने इस अभियान को और गति देने के साथ-साथ डीआईओएस, बीएसए के साथ मिलकर प्रधानाचार्यों की बैठक करने के निर्देश दिए ताकि स्कूलों के साथ मिलकर एनीमिया मुक्त कार्यक्रम को तेजी से चलाया जा सके। बैठक में जिला स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी अनिल यादव, आईसीटीसी के काउंसलर डॉ.प्रशांत, वरुण पाण्डेय, राजेंद्र आदि मौजूद रहे।

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