01 नवम्बर : केरल का स्थापना दिवस

1 नवंबर 1956 को केरल राज्य का गठन किया गया था। केरल दक्षिण भारत में स्थित राज्य है , जो भारत के दक्षिण-पश्चिम सीमा पर स्थित है। इसकी राजधानी तिरुवनन्तपुरम (त्रिवेन्द्रम) है। केरल को ‘भारत का मसालों का बगीचा’ कहा जाता है। यह मलय पर्वत की क्रोड में बसा हुआ प्रदेश है, जिसमें भूतपूर्व त्रावणकोर और कोचीन की रियासतें सम्मिलित हैं।

 

केरल: राज्य गठन का संक्षिप्त इतिहास
स्‍वतंत्र भारत में जब छोटी-छोटी रियासतों का विलय हुआ, तब त्रावनकोर तथा कोचीन रियासतों को मिलाकर 1 जुलाई, 1949 को ‘त्रावनकोर कोचीन’ राज्‍य बना दिया गया, लेकिन मालाबार मद्रास प्रांत (वर्तमान चेन्नई) के अधीन ही रहा। ‘राज्‍य पुनर्गठन अधिनियम’, 1956 के अंतर्गत ‘त्रावनकोर-कोचीन राज्‍य तथा मालाबार’ को मिलाकर 1 नवंबर, 1956 को ‘केरल राज्‍य’ का निर्माण किया गया। हिन्दुओं और मुसलमानों के अतिरिक्त यहाँ ईसाई भी बड़ी संख्या में रहते हैं। इस राज्य का क्षेत्रफल 38863 वर्ग कि.मी. है।

केरल: भौगोलिक स्थिति
केरल दक्षिण भारत में स्थित है। केरल के पूर्व में ऊंचे पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर के मध्य में स्थित इस प्रदेश की चौड़ाई 35 कि. मी. से 120 कि. मी. तक है। भौगोलिक दृष्टि से केरल पर्वतीय क्षेत्रों, घाटियों, मध्‍यवर्ती मैदानों तथा समुद्र का तटवर्ती क्षेत्र हैं। केरल नदियों और तालाबों के सम्बंध में बहुत ही समृद्ध है। केरल में 44 नदियां बहती हैं जिनमें 41 नदियाँ पश्चिम की ओर और तीन पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ हैं। ये नदियाँ अपनी सहायक नदियों और उपधाराओं के साथ केरल की प्राकृतिक संपदा को बढ़ाती हैं। समुद्री झीलें केरल का मुख्य आकर्षण हैं। आर्थिक दृष्टि से भी प्राकृतिक संसाधन बहुत म‍हत्‍वपूर्ण हैं। उत्तरी केरल राज्य के एक अंत:क्षेत्र दक्षिण भारत में माहि नगर स्थित है।

जलवायु
केरल राज्य की जलवायु की मुख्य विशेषता है- शीतल मन्द हवा और भारी वर्षा।
केरल राज्य में गर्म मौसम है क्योंकि यह भूमध्यरेखा से मात्र 8 डिग्री के अंतराल पर स्थित है। पश्चिमी मानसून से प्रमुख वर्षा काल प्रारम्भ होता है। दूसरा वर्षाकाल उत्तरी-पश्चिमी मानसून है । प्रत्येक वर्ष लगभग 120 से लेकर 140 दिन तक वर्षा होती रहती है । केरल की औसत वार्षिक वर्षा 3017 मिली मीटर मानी जाती है । केरल में भारी वर्षा से बाढ़ भी आती हैं जिससे जन और धन की भी बहुत हानि होती है ।

केरल: अर्थव्यवस्था
भौगोलिक और भौगर्भिक कारक केरल की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। यहाँ की सघन आबादी के लिए उपलब्ध कृषि योग्य भूमि काफ़ी नहीं है। इस राज्य में जीवाश्म ईधनों और खनिजों के प्रमुख भंडारों की भी कमी है। यहाँ सिर्फ इल्मेनाइट (टाइटेनियम का प्रमुख अयस्क), रयूटाइल (टाइटेनियम ऑक्साइड), मोनाजाइट (सीरियम और थोरियम फास्फेट युक्त खनिज) हैं, जो समुद्र तट की रेत में पाए जाते हैं। केरल में जलविद्युत की काफ़ी संभावनाएँ हैं। इडुक्की कॉम्पलेक्स विशालतम विद्युत उत्पादन संयंत्र है।

कृषि
कृषि इस राज्य की मुख्य आर्थिक गतिविधि है। खेती योग्य कुल भूमि के आधे से भी कम हिस्से में स्थित वाणिज्यिक बागान काफ़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं, लेकिन साथ ही स्थानीय खपत के लिए खाद्य सामग्री के आयात की भी आवश्यकता पड़ती है। केरल की प्रमुख नकदी फसलों में बारहमासी सुपारी, इलायची, काजू, नारियल, कॉफी, अदरक, काली मिर्च, रबर और चाय हैं। वाणिज्यिक मुर्गीपालन सुविकसित है। यहाँ के जंगलों में आबनूस, रोजवुड और सागौन जैसी कीमती इमारती लकड़ियाँ और औद्योगिक कच्चा माल, जैसे बांस, लकड़ी की लुगदी, काष्ठ कोयला, गोंद और राल प्राप्त होता है। विदेशी ख़रीदार कोच्चि में होने वाले चाय और इमारती लकड़ियों की नीलामी में नियमित तौर पर हिस्सा लेते हैं।
मछली उत्पादन में केरल भारतीय राज्यों में सर्वप्रथम है।

औद्योगीकरण
अधिकांश आबादी औद्योगिकीकरण से अप्रभावित है। बेरोज़गारी की समस्या गंभीर है और बेरोज़गार लोगों में शिक्षा का उच्च स्तर इस समस्या को और गंभीर बना देता है। अधिकांश श्रमिक पारंपरिक, कम मज़दूरी वाले कुटीर उद्योगों, जैसे नारियल के रेशों और काजू प्रसंस्करण या बुनाई में संलग्न हैं। केरल के एक-चौथाई से अधिक श्रमिक सेवा-क्षेत्र में है। खाद्य प्रसंस्करण, औद्योगिक रोज़गार का सबसे बड़ा साधन है। अन्य उत्पादों में उर्वरक, रसायन, बिजली के उपकरण, टाइटेनियम, ऐलुमिनियम, प्लाइवुड, चीनी मिट्टी के बर्तन और कृत्रिम रेशे शामिल हैं। परन्तु केरल में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं है। यहाँ पर पनबिजली, घने वन, दुर्लभ खनिज, परिवहन और अच्छी संचार प्रणाली, सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध हैं। यहाँ के परंपरागत उद्योग हैं- हथकरघा, काजू, नारियल जटा तथा हस्‍तशिल्‍प। अन्‍य महत्‍वपूर्ण उद्योगों में रबड, चाय, चीनी मिट्टी के बर्तन, बिजली तथा इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरण, टेलीफ़ोन के तार, ट्रांसफार्मर, ईंट और टाइल्स, औषधियां और रसायन, सामान्‍य इंजीनियरी वस्‍तुएं, प्‍लाईवुड, रंगरोगन, बीड़ी और सिगार, साबुन, तेल, उर्वरक तथा खादी और ग्रामोद्योग उत्‍पाद शामिल हैं। इसके अलावा महीन उपकरण, मशीनी औज़ार, पेट्रोलियम पदार्थ, पेंट, लुगदी, काग़ज़, अखबारी काग़ज़, कांच तथा अलौह धातुओं के उत्‍पादन के लिए राज्‍य में कई कारखाने हैं। निर्यात की जाने वाली वस्‍तुओं में प्रमुख हैं- काजू, चाय, मसाले, लेमन ग्रास ऑयल, समुद्री खाद्य उत्‍पाद, शीशम और नारियल रेशा। राज्‍य में इल्‍मेनाइट, रटल, मोनाजाइट, जिरकोन, सिलीमेनाइट, चिकनी मिट्टी तथा स्‍फटिक युक्‍त बालू जैसे महत्‍वपूर्ण खनिज भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

केरल: संस्कृति
केरल की संस्कृति वास्तव में भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय उपमहाद्वीप की तरह केरल की संस्कृति का भी एक पुरातन इतिहास है जो अपने आप में महत्त्वपूर्ण होने का दावा करता है। केरल की संस्कृति भी एक समग्र और महानगरीय संस्कृति है जिसमें कई लोगों और जातियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। केरल के लोगों के बीच समग्र और विविधतावादी सहिष्णुता और दृष्टिकोण की उदारता की भावना का उद्वव अभी है जिससे नेतृत्व संस्कृति का विकास लगातार जारी है। केरल का इतिहास सांस्कृतिक और सामाजिक संष्लेषण की एक अनोखी प्रक्रिया की रोमांटिक और आकर्षण कहानी कहता है। केरल ने हर चुनौती का माक़ूल जवाब देते हुए प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन किया है और साथ ही पुरानी परंपराओं और नए मूल्यों का मानवीय तथ्यों से संलयन किया है। भारतीय उपमहाद्वीप की तरह केरल की संस्कृति का भी एक पुरातन इतिहास है जो अपने आप में महत्त्वपूर्ण होने का दावा करता है।

केरल की संस्कृति अपनी पुरातनता, एकता, निरंतरता और सार्वभौमिकता की प्रकृति के कारण उम्र के हिसाब से माध्यम बनाए हुए है। इसके व्यापक अर्थ में यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनुष्य की आत्मा की सर्वोच्च उपलब्धियों को गले लगाती है। कुल मिलाकर यह धर्म और दर्शन, भाषा और साहित्य, कला और स्थापत्य कला, शिक्षा और सीखना और आर्थिक और सामाजिक संगठन के क्षेत्र में लोगों की समग्र उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व करती है।

केरल के जिले – Districts of kerala
केरल में कुल 14 जिले है, जिनमे से हर एक जिला अद्वितीय गंतव्य और प्रलोभन के लिए प्रसिद्ध है।

थिरुवनंतपुरम
कन्नूर
अलाप्पुज्हा
कासरगोड
कोट्टयम
इडुक्की
थ्रिस्सुर
कोल्लम
पलक्कड़
पठानमथित्ता
मलप्पुरम
कोज्हिकोड़े
एर्णाकुलम
वायनाड

केरल का धर्म – Religion of Kerala
भारत के दुसरे राज्यों की तुलना में केरल का अनुभव थोडा साम्प्रदायिक है। राज्य की आधे से ज्यादा जनसँख्या हिन्दू धर्म को मानती है, इसके बाद इस्लाम और क्रिस्चियन धर्म की बारी आती है। मलप्पुरम जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलो में हिन्दू धर्म के लोगो की संख्या ज्यादा है, मलप्पुरम जिले में मुस्लिम जनजाति के लोगो की संख्या ज्यादा है। भारत के केरल राज्य में सर्वाधिक क्रिस्चियन समुदाय के लोग रहते है।

पौराणिक किंवदंतियों के अनुसार केरल की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से हुई। केरल ने भारत को बहुत से संत और स्मारक दिए है। हिंदुत्व और अद्वैत दर्शन का प्रसार करने वाले आदिशंकराचार्य एक धार्मिक दर्शनशास्त्री थे, जिनका सम्बंध केरल से है।

अशोका के समय में यहाँ बुद्ध धर्म काफी प्रसिद्ध था लेकिन 12 वी शताब्दी से यह भी धूमिल हो गया। कुछ हिन्दू समुदाय जैसे सामंत क्षत्रिय्म अम्बलावासी, नायर, तिय्यास और मुस्लिम मरुमाक्काथायम के नाम से जाने जानी वाली पारंपरिक मैट्रिलिनियल प्रणाली अपनाते थे, जबकि भारत की आज़ादी के बाद यह प्रणाली भी धूमिल हो गयी। भारत के दुसरे राज्यों की तुलना में केरल राज्य में लिंग असमानता की मात्रा ज्यादा है।

 

आशा हैं हमने ऊपर दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट हुए होंगे अगर नहीं तो कृपया कमेन्ट के जरिये हमें बताएं। आज के इतिहास के बारे में और भी जानकारी हो तो वो भी हमें कमेन्ट के जरिये बताये हम इस लेख में जरुर अपडेट करेंगे।

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