24 जुलाई – आयकर दिवस – Income tax day

 

  • भारत में पहली बार 24 जुलाई, 1860 को आयकर लागू किया गया था।
  • 24 जुलाई 1860 को ब्रिटिश शासन द्वारा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन को हुए नुकसान की भरपाई के लिये सर जेम्स विल्सन द्वारा भारत में पहली बार आयकर पेश किया गया था।
  • CBDT द्वारा करदाताओं एवं अन्य हितधारकों को उनका रिटर्न ई-फाइल करने तथा अन्य कर संबंधी दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम बनाने और उनकी सहायता करने के लिये एक ‘करदाता ई-सहयोग अभियान’ (Kardaata e-Sahyog Abhiyaan) भी शुरू किया जाएगा।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

Central Board of Direct Taxation

  • वर्ष 1963 में ‘केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963’ (Central Board of Revenue Act, 1963) के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन दो संस्थाओं का गठन किया गया था, जो निम्नलिखित हैं-

1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxation)

2. केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Excise and Customs)

  • ये दोनों ही संस्थाएँ ‘सांविधिक निकाय’ (Statutory Body) हैं।
  • इनमें से CBDT. प्रत्यक्ष करों से संबंधित नीतियों एवं योजनाओं के संबंध में महत्त्वपूर्ण इनपुट प्रदान करने के साथ-साथ आयकर विभाग की सहायता से प्रत्यक्ष करों से संबंधित कानूनों का प्रशासन करता है। वहीं CBEC भारत में सीमा शुल्क (custom duty), केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty), सेवा कर (Service Tax) तथा नारकोटिक्स (Narcotics) के प्रशासन के लिये उत्तरदायी नोडल एजेंसी है।

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स्टबल कटिंग मशीन

(Stubble Cutting Machines)

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में फसल अवशेषों के स्व-स्थाने (In-situ) प्रबंधन हेतु कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने दो वर्षों के लिये एक नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना को मंज़ूरी दी है।

  • इस योजना के तहत किसानों को फसल के अवशेषों के स्व-स्थाने प्रबंधन के लिये आवश्यक मशीनरी में सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

योजना का उद्देश्य

  • वायु प्रदूषण को कम करना तथा फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले पोषक तत्त्वों एवं मृदा के सूक्ष्मजीवों की हानि को रोकना।
  • उचित मशीनीकरण के माध्यम से फसल अवशेषों के स्व-स्थाने प्रबंधन को बढ़ावा देना।
  • फसल अवशेष प्रबंधन विधियों का प्रदर्शन, क्षमता निर्माण गतिविधियाँ तथा फसल अवशेषों के प्रभावी उपयोग एवं प्रबंधन हेतु शिक्षा-संचार रणनीतियों के माध्यम से हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा करना।

 

 

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