World Day Against Child Labour 2020: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस और इसका महत्व

World Day Against Child Labour 2020: हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने की थी। इसके बाद से हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है। इस साल का थीम वैश्विक संकट का बाल श्रम पर प्रभाव ( impact of crisis on child labour) है।

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बाल श्रम निषेध दिवस इतिहास

अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ, संयुक्त राष्ट्र संघ की एक शाखा है। यह संघ मजदूरों तथा श्रमिकों के हक के लिए नियम बनाती है, जिसे सख्ती से पालन किया जाता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ कई बार पुरस्कृत भी हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने ही अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार बाल श्रम को रोकने अथवा निषेध लगाने पर बल दिया था, जिसके बाद 2002 में सर्वसम्मति से एक कानून पास कर किया गया। इस कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराने को अपराध माना गया। इसी साल पहली बार बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाया गया।

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भारत में बाल श्रम निषेध दिवस

भारत में बाल श्रम व्यापक स्तर पर है। यहां बाल मजदूरी के लिए बच्चों की तस्करी भी की जाती है। इस संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकारें सराहनीय कदम उठा रही हैं। इसके लिए सबसे पहले 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराना गैर-क़ानूनी कर दिया गया। इसके साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 बच्चों को खतरनाक उद्योग और कारखानों में काम करने की अनुमति नहीं देता है। जबकि धारा 45 के अंतर्गत देश के सभी राज्यों को 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देना अनिवार्य किया गया है।

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